लखनऊ से आप बीती कुछ बाते आपने एहसान फरामोश शब्द अपने जीवन में कई बार सुना होगा पर वाकई इसे आजमाना और भी आसान आज के समय में हो गया है।
आज से लगभग दो साल पहले मेरे पास लखनऊ के हिंद नगर में रहने वाले जो कभी हमारे पड़ोसी हुआ करते थे सब इंस्पेक्टर साहब का फोन आया और उन्होंने पूछा कि मेरी बहू का शिक्षक भर्ती में चयन हुआ है और हरदोई मिला है हरदोई में कोई मदद करने वाला हो तो बताइए। मेरे हस्बैंड ने अपने एक पुराने मित्र का नंबर दिया जो लखनऊ हरदोई बॉर्डर में शिक्षक हैं उनके पास फोन गया और उन्होंने हर संभव मदद भी की , कईअच्छे ऐसे स्कूल बताएं जो खाली थे
जहां जाने की सुविधा थी और जो लखनऊ से पास थे क्योंकि नियुक्ति पाई शिक्षिका का ससुराल लखनऊ और मायका शाहजहांपुर था । सब इंस्पेक्टर साहब के औहदा था,पैसा था तो उन्होंने मैनेज करके मास्टर साहब का ही स्कूल ले लिया वही नियुक्ति करा ली अपनी बहू की।क्योंकि वह लखनऊ और हरदोई के बॉर्डर पर था जबकि वह बंद था वहां पहले से छः शिक्षक नियुक्त थे। चलिए यह तो शिक्षा विभाग का कमाल है यहां कुछ भी असंभव नहीं है।नौकरी शुरू हो गई लगभग ढाई साल व्यवहार भाईचारे में बीता।अभी तक सब इंस्पेक्टर साहब को कोई तकलीफ थी ना ही उस महिला शिक्षिका को और ना ही उसके पति को, पर संबंध बदलते देर नहीं लगती हम सभी ने सुना है वह भी दिन आ गया।
बेसिक शिक्षा विभाग में जून में परिवार सर्वेक्षण करने का काम शिक्षकों को दिया गया जिन गांव के कई मजरे होते हैं वहां शिक्षकों को एक-एक मजरा विभाजित कर दिया जाता है इनके भी हेड मास्टर जो कि काफी सज्जन व्यक्ति थे उन्होंने सभी स्टॉफ को शिक्षकों आवंटन किया जिन महीला शिक्षकों के बच्चे छोटे थेया आने जाने के साधन की मजबूरी थी उन्हें पास का मजरा दिया गया और सबसे पास का मजरा इंस्पेक्टर साहब की बहू को दे दिया। हां यह बात जरूर थी कि इस पास के मजरे में एकसौ बीस घर थे और जो दूर के मजरे थे वहां घर कहां थे पर जाने की दिक्कत थी। इन्हें लगा पास जाने में सुविधा होगी अतः इस नवनियुक्त शिक्षकों को यह दे दिया गया।
सर्वे हो गया ,सर्वे हो जाने के बाद करने वाले को यह लिखकर देना पड़ता है कि मेरे द्वारा 100% सर्वे पूरा कर लिया गया है और इसमें बताई गई सभी बातें सत्य हैं ।महिला सहायक अध्यापक ने भी यह बात लिख कर के दे दिया रिपोर्ट ऑनलाइन फीड कर बीएसए ऑफिस भेज दी गई ।परंतु इसी बीच उस गांव के जिला पंचायत सदस्य एक दिन विद्यालय आए और गुस्सा करते हुए बोले कि सर्वे में हमारे घर शामिल नहीं किए गए हैं जो कि मेरे ही परिवार के हैं तो क्या हम लोगों से विशेष दुश्मनी है इस पर हेड मास्टर ने कहा कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है जिस ने सर्वे किया है उससे मैं पूछ कर बताता हूं कि किस कारण छूट गए।
क्योंकि जून का समय था लोग अपने घरों में थे लगातार विद्यालय बंद थे तो पूछने और जांचने का काम धीमी गति से हो रहा था।इसके पहले ही गांव के रहने वाले उस व्यक्ति ने घर छुटने की मुख्यमंत्री पोर्टल में शिकायत कर दी और इस शिकायत की जांच डीएम स्तर से आ गई और 5 जून को विद्यालय आकर उन्हें सर्वेक्षण करने का आदेश महिला शिक्षकों को दिया गया क्योंकि यह सारे काम लिखा पढ़ी में हो रहे थे और मैडम उस दिन भी नहीं आई इसलिए मजबूरी में हेड मास्टर को यह कहना पड़ा कि मैं सर्वे किसी और से करा रहा हूं और महिला शिक्षिका
उस दिन विद्यालय में उपस्थित नहीं हुई और ना ही उसने कोई छुट्टी अप्लाई की जिसके कारण उसका एक दिन का वेतन कट गया। उस और उस वेतन कटने का दर्द इतना ज्यादा था कि इंस्पेक्टर साहब और उस महिला के पति ने हेड मास्टर को फोन द्वारा धमकियां देना शुरू कर दिया और देख लेने की धमकी भी दी क्योंकि ससुर साहब पुलिस में थे अतः सारे हथकंडे उन्हें पता ही है नियम और कानून के जबकि इस पूरे प्रकरण में ऐड मास्टर के हाथ में कुछ नहीं था अगर होता तो पिछले ढाई साल से जिस तरह वह निभा रहा था निभा ही देता।
परसों पता चला महिला शिक्षिका के रसूखदार ससुर जोकि पुलिस में एस आई है उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल तथा शाहजहांपुर में अपनी तैनाती के प्रभाव से प्रधानाध्यापक की शिकायत भी मुख्यमंत्री पोर्टल में करा दी और जानकर हंसी आई दुख हुआ और आश्चर्य हुआ और यह भी समझ में आया कि वाकई कलयुग चरम पर है अपनी ही बहू की इज्जत आबरू उतारते इंस्पेक्टर को शर्म नहीं आई आरोप लगा कि हेड मास्टर महिला को गंदी निगाहों से देखते हैं अश्लील बातें करते हैं और उसकी वैन का पीछा गुंडों से कराते हैं और कभी कभी खुद भी करते हैं। सुनकर हास्यास्पद लगता है उस वन में उसी विद्यालय की कई टीचर और अड़ोस पड़ोस के विद्यालय के भी कई शिक्षक रहते हैं।
क्योंकि यह वही इंस्पेक्टर साहब हैं जिन्हें उनकी बहू को अच्छा स्कूल मिल सके इस जानकारी के लिए इसी प्रधानाध्यापक का नंबर मेरे पति द्वारा प्रदान किया गया था इसलिए मैंने इंस्पेक्टर साहब को फोन करके समझाने कि इस तरह की शिकायत करते ना तो आपको अच्छा लगता है और ना हमें सुनने में अच्छा लगता है क्योंकि वह मास्टर साहब ऐसे नहीं हैं उसी रिस्पेक्ट से हमेशा देखते हैं और हम लोगों के साथ लगभग 25 साल पुराने संबंध है कभी कोई गतिविधि ऐसी नहीं रही इससे महिला के सम्मान अस्मत के प्रति उनके मन में कोई गलत भाव और सबसे मजे की बात यह रही कि इंस्पेक्टर साहब ने मुझे पहचानने से ही इनकार कर दिया. और कहां की मैडम मैंने बड़ा सोच लगाकर डीएम तक शिकायत पहुंचाई है तो डीएम साहब ही बताएंगे और इन मास्टर साहब को सजा दिलाकर मानेंगे।
जब किसी शिक्षक की नियुक्ति किसी जिले में होती है तो वह अक्सर मुझसे उस जिले में पहले से तैनात यूनियन के अध्यक्ष या ऐसे शिक्षक का नंबर मांगते हैं जो लगभग सभी स्कूलों से परिचित हो और मेरे द्वारा पर्सनली उनको मदद करने के लिए कह भी दिया जाता है लेकिन आप ही सोचिए इस तरह की घटना के बाद क्या मदद के लिए हाथ आगे बढ़ेंगे.अब वह बेचारा हेड मास्टर डीएम,बीए से एसडीएम ,खंड शिक्षा अधिकारी और तो और थाने के चक्कर लगाने में व्यस्त है बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता की बात करते हम ऐसे शिक्षकों को कब सुधार पाएंगे जो तनख्वाय तो मोटी लेना चाहते हैं पर विद्यालय में जाकर बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहते और पूरा शिक्षा विभाग बदनाम होता है।यदि पुरुष हेड मास्टर इस आने जानें, अनुपस्थिति की गतिविधि में कोई सवाल उठा दे तो उनके ऊपर इज्जत आबरू लूटने का सीधा आरोप लगा दिया जाता है.
मनन करे समाज कहा जा रहा है और देश की प्रगति किस तरफ है जब तक नौकरी नहीं मिलती तब तक एड़ी चोटी लगा देते हैं और मिलने के बाद विद्यालय तक जाकर बच्चों को पढ़ाना भारी लगता हैं।वाकई दुनिया बड़ी एहसान फरामोश अपना काम निकल जाने के बाद पहचानते भी नहीं लोग @रीना त्रिपाठी
