अररिया(रंजीत ठाकुर): जिले में हर साल आने वाली बाढ़ गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में शुमारा है। इसके कारण जिलावासियों को हर साल करोड़ों को नुकसान झेलना पडता है। गौरतलब है कि जिले के कुल 211 पंचायतों में 72 पंचायत हर साल बाढ़ से पूर्णत: प्रभावित होते हैं। शेष 61 पंचायतों में बाढ़ का आंसिक असर देखा जाता है। जिले के कुल 35 प्रतिशत क्षेत्र में अमूमन हर साल बाढ़ का असर देखा जा सकता है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक जलजमाव की स्थिति बने रहने से जलजनित बीमारियों के प्रकोप बढ़ जाता है। जो देखते ही देखते महामारी का रूप धारण कर जानमाल को गंभीर क्षति पहुंचाता है। संभावित खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को पत्र जारी कर विशेष निर्देश दिये हैं।
जिला स्तर पर होगी विशेष समिति गठित
जारी दिशा निर्देश के मुताबिक जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महामारी रोकथाम समिति गठित किया जाना है। इसमें डीडीसी, एसपी, सिविल सर्जन, आपूर्ति विभाग, जिला आपदा प्रबंधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी सदस्य होंगे। समिति के माध्यम से पूर्व अनुभवों के आधार पर जिले के बाढ़ या जल-जमाव से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के संभावित क्षेत्रों को चिह्नित किया जायेगा। वहां पर त्वरित रूप से उपचारात्मक व निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराया जायेगा।
बाढ़ से पूर्व तैयारियों की समीक्षा के लिये होगा मॉकड्रिल
अपर मुख्य सचिव ने बाढ़ पूर्व तैयारियों की समीक्षा को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों व गैर सरकारी संगठनों के साथ नियमित अंतराल पर मॉक मॉक ड्रिल के आयोजन का निर्देश दिया है। पीएचईडी विभाग के माध्यम से चिह्नित क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल का इंतजाम सुनिश्चित कराया जायेगा। वहीं, बड़े जलस्रोतों के लिए ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल का निर्देश है। जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे डेंगू, मलेरिया, कालाजार सहित अन्य रोगों के प्रसार का खतरा बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिये जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी को संबंधित इलाकों में डीडीटी का छिड़काव व फोगिंगका निर्देश दिया गया है। जिला व प्रखंड स्तर पर स्वच्छता निरीक्षकों द्वारा पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिये नमूनों के संग्रह का आदेश है। ताकि इसकी जांच जिला व प्रमंडल स्तरीय प्रयोग शाला में संभव हो सके।
विशेष चिकित्सकीय दल होगा गठित
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विशेष चिकित्सा दल गठित किया जायेगा। इसमें मोबाइल दल भी शामिल होंगे। दल में चिकित्सा पदाधिकारी के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ शामिल किये जायेंगे। सर्पदंश के इलाज को लेकर सभी जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नवजात शिशुओं के टीकाकरण का समुचित इंतजाम, गर्भवती महिलाओं की पूर्व पहचान करते हुए डिलीवरी किट व मैटरनिटी हट के इंतजाम का निर्देश दिया गया है। इतना ही नहीं बाढ़ प्रभावित इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उपकेंद्र, स्कूल, पंचायत भवन सहित अन्य जगहों पर अस्थायी अस्पताल खोलने, प्रभावित इलाकों का संपर्क भंग होने की स्थिति में नौका औषधालय संचालित करने का निर्देश है।
