बिहार

एसडीपीओ ने सीमा का बढ़ाया मनोबल, बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री का किया वितरण

जमुई(मो० अंजुम आलम): दिव्यांग्ता शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक होती है। यह सच कर दिखाया है खैरा प्रखंड के फतेहपुर गांव के महादलित टोले की सीमा ने। हादसे में एक पैर गंवाने के बाद भी बुलंद हौसले के साथ पगडंडी के सहारे स्कूल पढ़ाई के लिए पहुंच रही है जिसकी जितनी तारीफ की जाए वह कम होगा। उक्त बातें जमुई एसडीपीओ डाक्टर राकेश कुमार ने दिव्यांग बच्ची से मिलने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि यह बच्ची हमलोगों के लिए प्रेरणादायी है। जिनके हौसले उज्जवल भविष्य की ओर इशारा कर रहा है। उन्होंने कहा कि” सफलता उनको मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है”। “माना कि अंधेरा घना है, पर यह किसने कहा कि दिया जलाना मना है”हम लोगों की कोशिश है कि समाज का हर वर्ग हनी गरीब नेता अभिनेता पदाधिकारी सब की भूमिका है कि समाज में जो निर्धन वंचित लोग है उसे हम लोग सशक्त बनाएं और उसे आगे बढ़ाने के लिए अपनी भागीदारी दें। दरअसल जमुई एसडीपीओ डाक्टर राकेश कुमार सीमा से मिलने फतेहपुर गांव पहुंचे थे। इस दौरान सीमा समेत अन्य गरीब महादलित के बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री का वितरण किए और सीमा का हौसला अफजाई करते हुए लक्ष्य साध कर पढ़ाई करने की बात कही और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस मौके पर एससी/एसटी थानाध्यक्ष विभांशु शेखर भाष्करम, पैक्स अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह, गोल्डन अंबेडकर, मनोज दास समेत अन्य पुलिस पदाधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद थे।

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