फुलवारीशरीफ, अजीत। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज के साथ दर्द और तकलीफ से राहत देना भी चिकित्सा की बड़ी जिम्मेदारी है. मरीज को केवल बीमारी से मुक्त करना ही चिकित्सा का उद्देश्य नहीं, बल्कि उसके जीवन के अंतिम दौर को भी सम्मान, सुकून और गरिमा के साथ बिताने में मदद करना जरूरी है. मंगलवार को महावीर कैंसर संस्थान में वर्ल्ड हॉस्पीस एंड पैलिएटिव केयर डे के अवसर पर आयोजित सीएमई में देश के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पैलिएटिव केयर की इसी मानवीय भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘दर्द का प्रबंधन पैलिएटिव केयर का जरूरी हिस्सा’ रही. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रसिद्ध स्त्रीरोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. शांति राय, एनएसएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. उमेश भदानी, आईजीआईएमएस के डॉ. राजेश सिंह और महावीर कैंसर संस्थान के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
पद्मश्री डॉ. शांति राय ने कहा कि कैंसर मरीज का इलाज केवल दवाओं और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए. मरीज की शारीरिक पीड़ा के साथ उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को समझना भी संपूर्ण इलाज का हिस्सा है. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज को इलाज के साथ अपनापन, भरोसा और सम्मान देना चिकित्सक और समाज की बड़ी जिम्मेदारी है.कैंसर के प्रति जागरूकता केवल मरीज और उसके परिवार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. मरीज की बीमारी और उपचार के अनुभव से समाज के दूसरे लोगों को भी जागरूक किया जा सकता है, ताकि वे कैंसर के संभावित खतरों, शुरुआती लक्षणों और समय पर जांच की जरूरत को समझ सकें. बीमारी की जानकारी और जागरूकता बढ़ने से कई लोगों को समय रहते उपचार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
संस्थान की चिकित्सा निदेशक सह कीमोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा सिंह ने कहा कि गंभीर बीमारी में मरीज के उपचार के साथ उसकी पीड़ा को समझना और कम करना भी उतना ही जरूरी है. पैलिएटिव केयर मरीज को दर्द से राहत देने के साथ मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती है. उन्होंने कहा कि परिवारों के छोटे होने और घर पर गंभीर मरीजों की देखभाल में बढ़ती कठिनाइयों के कारण पैलिएटिव केयर की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है. यह सुविधा सिर्फ कैंसर मरीजों के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निदेशक प्रशासन डॉ. बी. सन्याल ने कहा कि पैलिएटिव केयर का उद्देश्य असाध्य बीमारी से जूझ रहे मरीज और उसके परिवार की तकलीफ कम करना है. इससे मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है और बीमारी के अंतिम चरण में उसे सहज एवं सम्मानजनक देखभाल मिलती है।
रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता त्रिवेदी ने बताया कि पैलिएटिव केयर में असहनीय दर्द के साथ नींद की परेशानी, भूख न लगना, कब्ज, थकान, बेचैनी, सांस फूलना और उल्टी जैसे लक्षणों को नियंत्रित किया जाता है. कैंसर के कारण होने वाले दुर्गंधयुक्त घाव और अल्सर की देखभाल एवं ड्रेसिंग के बारे में भी परिजनों को प्रशिक्षित किया जाता है. कोशिश रहती है कि मरीज जीवन के अंतिम क्षण तक अनावश्यक दर्द और तकलीफ में न रहे।
वैज्ञानिक सत्र में एनएसएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. उमेश भदानी ने आध्यात्मिक पीड़ा को चिकित्सा का महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा पहलू बताया. उन्होंने कहा कि बीमारी का दर्द सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता. कई बार मरीज की आत्मा, अस्तित्व और जीवन के अर्थ से जुड़ी पीड़ा भी उतनी ही गहरी होती है. इसलिए मरीज की संपूर्ण देखभाल के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं को समझना जरूरी है।
पैलिएटिव केयर एंड हॉस्पीस की इंचार्ज एवं रेडियोथेरेपी विभाग की वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. ऋता रानी ने कहा कि दर्द प्रबंधन में केवल दवाओं का इस्तेमाल पर्याप्त नहीं है. मरीज के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक दर्द को समझते हुए काउंसलिंग, थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव जैसी पद्धतियों को भी उपचार का हिस्सा बनाना चाहिए।
कार्यक्रम में पटना के विभिन्न अस्पतालों के चिकित्सकों के अलावा महावीर कैंसर संस्थान के डॉ. सुबोध कुमार सिन्हा, डॉ. सी. खंडेलवाल, डॉ. उषा सिंह, डॉ. मुकुल मिश्रा, डॉ. टी.आर. रहमान, डॉ. ऋचा चौहान, डॉ. शाहीन, डॉ. राहुल जनक सिन्हा, डॉ. अंजलि और डॉ. कुणाल रंजन समेत कई चिकित्सकों ने हिस्सा लिया. पैलिएटिव केयर विभाग की सिस्टर झुमा बनर्जी के नेतृत्व में नाटक की प्रस्तुति के जरिए मरीजों की पीड़ा और देखभाल का संदेश दिया गया. अंत में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एल.बी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
