(अधिवक्ता चित्रा द्विवेदी, कानूनी सलाहकार)
न्यूज़ क्राइम 24। आज के डिजिटल दौर में UPI, मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ Cyber Fraud के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, KYC, निवेश, नौकरी या Customer Care के नाम पर ठगी आम होती जा रही है। यदि आपके खाते से धोखाधड़ी से पैसा चला गया है, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना सबसे जरूरी है।
सबसे पहले क्या करें?
- 1930 पर तुरंत कॉल करें: Financial Cyber Fraud की सूचना तत्काल National Cyber Crime Helpline 1930 पर दें।
- Bank को तुरंत सूचित करें: अपने Bank/UPI provider को fraudulent transaction की जानकारी देकर transaction dispute, account/card security और आवश्यक रोकथाम की मांग करें। Complaint/reference number अवश्य लें।
- Cyber Crime Portal पर शिकायत करें: cybercrime.gov.in पर financial fraud की पूरी जानकारी दर्ज करें।
- Evidence सुरक्षित रखें: Bank statement, UTR/Transaction ID, UPI ID, mobile number, WhatsApp chats, SMS, emails, screenshots, links और payment receipts को सुरक्षित रखें। कोई evidence delete या edit न करें।
कानून क्या कहता है?
Fraud के facts के अनुसार Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की Section 318 (Cheating), Section 319 (Cheating by Personation) तथा Information Technology Act की Sections 66C और 66D लागू हो सकती हैं।
यदि fraudulent money किसी account/property तक trace होती है, तो BNSS Section 107 के तहत कानून के अनुसार attachment/restoration की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। Victim compensation के लिए BNSS Section 396 भी relevant हो सकती है।
Bank की liability क्या है?
हर cyber fraud में Bank स्वतः पैसा वापस करने के लिए liable नहीं होता। लेकिन RBI के customer-protection framework के तहत unauthorized electronic transactions में customer की liability fraud की प्रकृति, customer negligence और Bank को सूचना देने के समय पर निर्भर करती है। इसलिए fraud का पता चलते ही Bank को सूचना देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
न्यायालयों का दृष्टिकोण
विभिन्न High Courts ने unauthorized electronic transactions के मामलों में कहा है कि केवल customer को negligent मान लेना पर्याप्त नहीं है; परिस्थितियों के अनुसार Bank को customer negligence establish करनी पड़ सकती है और eligible cases में refund का आदेश भी दिया जा सकता है।
