बिहार

एम्स पटना में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत ‘दिल की सेहत’ पर जागरूकता कार्यक्रम

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) स्वस्थ दिल की शुरुआत केवल अस्पताल से नहीं हमारी थाली से भी होती है। इसी संदेश के साथ एम्स पटना के डायटेटिक्स विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह के तहत 17 सितंबर 2026 को कार्डियक ओपीडी में पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान और बेहतर जीवनशैली के महत्व पर चर्चा की गई। हृदय रोग आज दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकटों में शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2022 में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों से लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई जो दुनिया भर में हुई कुल मौतों का करीब 32 प्रतिशत था। इनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। भारत में भी हृदय रोगों का बोझ महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में गैर संचारी रोगों से होने वाली मौतों में हृदय रोगों की बड़ी हिस्सेदारी है और 40 से 69 वर्ष की आयु वर्ग में हृदय संबंधी बीमारियाँ विशेष चिंता का विषय हैं। कार्यक्रम राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आयोजित किया गया। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ‘सुपोषित भारत’ के निर्माण की दिशा में लोगों को संतुलित और पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करना है।

एम्स पटना का डायटेटिक्स विभाग पिछले दो वर्षों से राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर विभिन्न जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ खान पान और बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह ने पोषण को स्वस्थ जीवन और रोगों की रोकथाम का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि खान-पान में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लंबे समय में स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुपम भम्बानी ने हृदय स्वास्थ्य और खान-पान के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला तथा हृदय रोगों से बचाव और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर डॉ. स्वर्णिम, डीएमएस (डाइट एंड किचन सर्विसेज) तथा डॉ. ऋचा जायसवाल, चीफ डायटीशियन ने भी पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं और मरीजों के लिए व्यक्तिगत आहार संबंधी सलाह के महत्व की जानकारी दी।

जागरूकता कार्यक्रम के बाद ‘न्यूट्रिशन डायलॉग’ का आयोजन किया गया जिसमें डायटेटिक्स विभाग के डायटीशियनों ने मरीजों और उनके परिजनों से संवाद किया। प्रतिभागियों ने अपने खान-पान से जुड़े सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने उन्हें स्वस्थ भोजन एवं जीवनशैली से संबंधित व्यावहारिक सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन, अधिक वजन, उच्च रक्तचाप और रक्त में शुगर एवं लिपिड का बढ़ना हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से दूरी और नमक का सेवन कम करने जैसे कदम हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। एम्स पटना द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से पोषण जागरूकता को स्वास्थ्य सेवा और रोगों की रोकथाम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने तथा ‘सुपोषित भारत’ के संकल्प को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

Related posts

न कैनवास, न कागज…ढ़ाई किलो के नारियल पर मधुरेंद्र ने उकेरी पीएम की जन्मदिन की खास कलाकृति, कला से दिया ‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ का संदेश

बाढ़ प्रभावितों की मदद में तख्त श्री हरमंदिर जी द्वारा वैशाली जिले के प्रभावित इलाकों में पहुंचाया लंगर

चौक थाना पुलिस की कार्रवाई में सात गिरफ्तार, स्मैक आरोपी समेत दो NBW वारंटी भी दबोचे

error: