औरंगाबाद(प्रमोद कुमार सिंह): ओबरा प्रखंड मुख्यालय स्थित सोनार गली निवासी आवेदिका सुनीता देवी ने विभागीय पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए संवाददाता के समक्ष गुरुवार को ब्यान दिया है, कि सरकारी नियमानुकूल तरीके से लोहिया बिहार स्वच्छ अभियान के तहत पर्यवेक्षिका के पद पर सर्वप्रथम महिला को ही प्राथमिकता देकर बहाली करना था! लेकिन विभागीय पदाधिकारियों ने आपस में ही तालमेल करके सरकारी नियमों को ताक पर रखकर ओबरा प्रखंड में पुरुष को प्रधानता देते हुए पर्यवेक्षक के पद पर बहाली कर दिया है! जो बिल्कुल गलत है, और बिहार में सुशासन राज का असली सच भी यही है, कि सरकारी नियमानुकूल तरीके से यदि कोई भी पीड़ित / पीड़िता विभागीय पदाधिकारियों के समक्ष लिखित रूप से शिकायत भी करता है
तो गलत करने वाले विभागीय पदाधिकारियों को इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता है? तब संवाददाता ने आवेदिका सुनीता देवी से सवाल पूछा कि क्या आपने इसकी लिखित शिकायत विभाग के वरीय पदाधिकारियों से भी की है? और प्रवेक्षक के पद पर जब विभागीय पदाधिकारियों द्वारा बहाली की जा रही थी? तब बहाली से पूर्व विभागीय पदाधिकारियों द्वारा ग्राम सभा की बैठक भी तो बुलाई गई होगी? इसके बाद ही विभागीय पदाधिकारियों ने निर्णय लेकर प्रवेक्षक के पद पर बहाली किया होगा? इसलिए आप प्रवेक्षक के पद पर बहाली किए जाने से पूर्व ही विभागीय पदाधिकारियों के समक्ष लिखित आवेदन देकर आपत्ति दर्ज की थी, या नहीं?
तब आवेदिका सुनीता देवी ने संवाददाता द्वारा पूछे गए सवालों का कैमरा पर ही जवाब देते हुए कहा कि मैं बहाली से पूर्व ही लिखित रूप में आवेदन देकर आपत्ति भी दर्ज की थी? और मैं प्रखंड, अनुमंडल कार्यालय से लेकर जिला के वरीय पदाधिकारियों से भी मुलाकात करके इस संबंध में लिखित रूप से आवेदन देकर शिकायत कर चुकी हूं? फिर भी विभाग के चार पदाधिकारियों ने मिलकर सरकारी नियम कानून को ताक पर रखते हुए प्रवेक्षक के पद पर बहाली कर दिया है? जो बिल्कुल अनुचित है? इसलिए मैं जिले के वरीय पदाधिकारियों से भी मांग करती हूं कि इसकी निष्पक्ष जांच करके सरकारी नियमानुकूल तरीके से महिला को प्राथमिकता देकर उचित बहाली किया जाए? ताकि लोगों को कानून पर भरोसा बना रहे, अन्यथा न्याय नहीं मिलने पर मैं बाध्य होकर न्यायालय पहुंचकर न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाऊंगी?
क्योंकि न्यायालय से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं है? ज्ञात हो कि सरकारी नियमानुकूल तरीके से लोहिया बिहार स्वच्छ अभियान के तहत पर्यवेक्षिका के पद पर सर्वप्रथम महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए जो बहाली किया जाना है? उसमें महिला आवेदिका को जीवीका सदस्य होना भी अनिवार्य है, और अनुभव प्राप्त होना भी अनिवार्य है!
इधर जब संवाददाता ओबरा बीपीआरओ पदाधिकारी से बात करना चाहा तो उन्होंने टेलीफोनिक बातचीत के क्रम में कहा कि यह बहाली सरकार के नीयमा कुल की गई है इस बाहाली में कोई गलत कार्य नहीं किया गया है, सरकार के गाइडलाइंस एवम दिशा निर्देश के अनुसार ही यह बहाली गई है जिनको अगर कोई भी दिक्कत है तो इस बहाली को लेकर तो अपने पंचायत सचिव से लिखित आवेदन देकर इस बहाली को गड़बड़ी के मामले में जानकारी ले सकते हैं।
