बिहार

हर बेटी बने मजबूत : रैंबो होम में आत्मनिर्भरता की उड़ान भरती बेटियां

दानापुर, अजीत। “बेटियाँ बोझ नहीं, समाज की धरोहर हैं”—इस संदेश को जीती हैं शिक्षिका नीतू शाही, जो रैंबो होम की जरूरतमंद बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के मिशन में जुटी हैं।

शिक्षिका नीतू शाही ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से समाज की उन बेटियों के सपनों को नयी उड़ान दी है, जो संसाधनों के अभाव में अपने लक्ष्य को अधूरा छोड़ने पर मजबूर हो जाती थीं। वे दानापुर स्थित रैंबो होम समर कैंप में बच्चियों को निशुल्क सिलाई, मधुबनी पेंटिंग, क्राफ्ट, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण के साथ-साथ शिक्षा संबंधी सहयोग भी उपलब्ध करवा रही हैं।

उनका यह प्रयास सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कई होनहार बच्चियों की पढ़ाई का खर्च भी खुद वहन कर रही हैं ताकि किसी की पढ़ाई सिर्फ गरीबी की वजह से अधूरी न रह जाए।

रैंबो होम समर कैंप में इन दिनों बच्चियों ने ब्यूटीशियन कोर्स और कबाड़ से जुगाड़ क्राफ्ट जैसे कौशल सीखे हैं। इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे अब अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखने लगी हैं। नीतू शाही अभिभावकों को भी जागरूक कर रही हैं कि “बेटियाँ बोझ नहीं, अगर उन्हें अवसर दिया जाए तो वे अपनी उड़ान खुद तय कर सकती हैं। उनका यह कार्य अब एक मिशन बन चुका है—
“हर बेटी पढ़े, सीखे और आगे बढ़े.”

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