पटना, जया कुमारी : शिक्षा विभाग द्वारा अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, गुणवत्तापूर्ण और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
सीएम ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर स्कूल तक पहुंचाने के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। परीक्षाओं को सुचारु, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति भी बनाई गई है। यह समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ कक्षा-आधारित मूल्यांकन में तकनीक और AI के उपयोग पर सुझाव देगी।
मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि बिहार से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बाहर जा रहे हैं। इसके लिए हर साल लगभग 18 हजार करोड़ रुपये राज्य से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोटा में लाखों बिहार के बच्चे पढ़ते हैं और वहां के शिक्षकों में भी बड़ी संख्या बिहार के लोगों की है।
इसीलिए सरकार “बिहार की शिक्षा को कोटा-जैसी” बनाने पर काम कर रही है ताकि बच्चों को बाहर न जाना पड़े। इसके लिए 551 मॉडल स्कूल बन चुके हैं और लक्ष्य 1001 मॉडल स्कूल बनाने का है।
छात्र कल्याण के अन्य ऐलान
- स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- निदेशालय का गठन – छात्रों के कल्याण के कार्यों में समन्वय के लिए।
- मासिक सहयोग शिविर – मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने छात्रों की समस्याएं सुनी जाएंगी।
- डायरेक्ट्रेट बनेगा – छात्र समस्याओं के समाधान के लिए सभी विभाग मिलकर काम करेंगे।
- 15 अगस्त से नई व्यवस्था – बच्चे रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे।
- AI का उपयोग – शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाया जाएगा। शिक्षा में अपराध करने वालों पर गुंडा एक्ट और सीसीए के तहत कार्रवाई होगी।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम भी मौजूद थे।
