पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) गुरुवार को जद (यू) प्रदेश कार्यालय, पटना स्थित कर्पूरी सभागार में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि फरक्का जल संधि पर ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत गंगा बेसिन से जुड़़़े 12 जिलों में बिहार के जल हितों को लेकर जनजागरूकता के उद्देश्य से की गई थी। प्रथम चरण में चार जिलों में जिस तरह लोगों का जनसमूह उमड़़़ा, उससे स्पष्ट है कि ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम को बिहार की जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि के तहत लीन पीरियड (शुष्क मौसम) में बिहार को 1500 क्यूमेक (53 हजार क्यूसेक) पानी बांग्लादेश को देना पड़़ता है, जबकि बिहार में गंगा का केवल 400 क्यूमेक (14 हजार क्यूसेक) पानी ही आता है। यानी 1100 क्यूमेक (39 हजार क्यूसेक) पानी बिहार को अपने हिस्से से देना पड़़़ता है। विडंबना यह है कि बिहार को जब पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब उसके हिस्से का पर्याप्त पानी नहीं मिलता। पिछले 30 वर्षों से बिहार के पानी के साथ अन्याय हो रहा है। बिहार के जलाशयों में भी केवल 35 प्रतिशत पानी ही रह पाता है।
श्री झा ने कहा कि फरक्का के कारण गंगा में गाद की समस्या लगातार बढ़़़़ी है। गाद के कारण गंगा की जलधारण क्षमता प्रभावित हुई और बिहार में बाढ़़ की समस्या और गंभीर होती गई। यानी फरक्का के कारण एक तरफ बिहार को गाद मिली, दूसरी तरफ बिहार का पानी बांग्लादेश चला गया। पिछले तीन दशकों में राज्य के संसाधनों का बड़़़़ा हिस्सा हर वर्ष बाढ़़़़ से राहत एवं बचाव तथा सड़़़कों और बांधों की मरम्मती में खर्च होता रहा है।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों से लगातार इस विषय को मजबूती और बेबाकी के साथ उठाते रहे हैं। उन्होंने कभी बिहार के हितों से समझौता नहीं किया। आज जद (यू) भी उसी नीति और सोच के साथ बिहार के जल हितों की आवाज मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में जब बिहार में राजद की सरकार थी, उस समय बिहार के हितों की अनदेखी करते हुए फरक्का जल संधि हुई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने बिहार के हित में इसके विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा, लेकिन आज वही लोग प्रवचन दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमने मानसून सत्र में सदन के समक्ष इस विषय को पूरी मजबूती के साथ उठाया था। इसके जवाब में विदेश मंत्री ने पत्र के माध्यम से सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और बिहार के हितों को प्राथमिकता देने के लिए आश्वस्त किया है। यह स्वागतयोग्य बात है, लेकिन बिहार के हितों की सुरक्षा की ठोस नीति और स्पष्ट व्यवस्था से सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य में नए उद्योग आ रहे हैं और सरकार डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़़़ रही है। आने वाले समय में औद्योगिक विकास के साथ पानी की जरूरत और बढ़़़़ेगी। वहीं, बढ़़़़ती आबादी के कारण पेयजल की मांग भी लगातार बढ़़़़ रही है। ऐसे में फरक्का जल संधि को लेकर हमारी पार्टी का स्पष्ट स्टैंड है कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। यदि किसी परिस्थिति में इसका नवीनीकरण होता भी है, तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, जिसमें बिहार की क्षति न हो। इस प्रेसवार्ता में बिहार सरकार के मा0 मंत्री श्री मदन सहनी, मुख्य प्रवक्ता सह मा0 विधान पार्षद श्री नीरज कुमार, विधान परिषद में सत्तारूढ़़ दल के मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी, प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी श्रीमती अंजुम आरा, प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया एवं श्री चंदन कुमार सिंह मौजूद रहे।
