बिहार

खेमनीचक सब्जी मंडी में भीषण अगलगी, 100 से अधिक झोपड़ियां राख

फुलवारीशरीफ, अजीत। रामकृष्णनगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक स्थित सब्जी मंडी में गुरुवार की अहले सुबह करीब 3:45 बजे अचानक भीषण आग लग गई. देखते ही देखते आग ने मंडी की झोपड़ीनुमा दुकानों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. आग इतनी तेजी से फैली कि दुकानदारों और आसपास के लोगों को सामान निकालने या आग बुझाने का मौका तक नहीं मिल सका. आग की चपेट में आने के बाद कई झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर एक के बाद एक तेज धमाके के साथ फटने लगे. धमाकों से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गयी।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही देर में मंडी का बड़ा हिस्सा आग के घेरे में आ गया. करीब 100 झोपड़ीनुमा दुकानों के जलने की चर्चा है. हालांकि, आग बुझने के बाद ही प्रभावित दुकानों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी. मंडी में सब्जी के अलावा श्रृंगार सामग्री, मोबाइल रिपेयरिंग और अन्य कारोबार से जुड़ी दुकानें भी थीं. दुकानों में रखा सामान पूरी तरह जल जाने से कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

आग की चपेट में कई मोटरसाइकिलें भी आ गयीं. मंडी में खड़ी बाइक धू-धूकर जलती रहीं. आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चारों तरफ धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं. सिलेंडरों के लगातार धमाके होने के कारण लोग मंडी के आसपास जाने से भी बचते रहे।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की करीब 10 से 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया. दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग को आसपास के इलाके में फैलने से रोका. करीब एक घंटे के प्रयास के बाद आग पर काबू पाया जा सका. इसके बाद भी मंडी के कई हिस्सों से धुआं उठता रहा।

करोड़ों के नुकसान की आशंका-

अगलगी में बड़ी संख्या में दुकानें और उनमें रखा सामान जलकर नष्ट होने से व्यापारियों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जतायी जा रही है. हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि का आकलन अभी नहीं किया गया है. आग पूरी तरह बुझने के बाद व्यापारी अपनी-अपनी दुकानों में हुए नुकसान का जायजा लेने में जुटे रहे।

व्यापारियों का कहना है कि आग कैसे लगी, इसका सही कारण जांच के बाद ही सामने आएगा. फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितनी दुकानें और झोपड़ियां पूरी तरह जलकर राख हुई हैं. दमकल विभाग और पुलिस की जांच तथा प्रभावित कारोबारियों से जानकारी जुटाने के बाद ही नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकेगा।

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