बिहार

एम्स पटना में स्ट्रोक के त्वरित उपचार के लिए विकसित होंगे 10 बेड, समर्पित स्ट्रोक सेंटर बनाने पर जोर

फुलवारीशरीफ, अजीत। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर एम्स पटना के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से गुरुवार को ‘स्पार्क 2026’ का आयोजन किया गया. इस अवसर पर जागरूकता अभियान के साथ बहुविषयक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित हुआ. ‘फर्स्ट कॉल से रिकवरी तक: स्ट्रोक प्रबंधन की बहुविषयक कार्यप्रणाली’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्ट्रोक की शीघ्र पहचान, आधुनिक उपचार, पुनर्वास और मरीजों की समग्र देखभाल पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम में एम्स पटना में स्ट्रोक मरीजों के त्वरित उपचार के लिए कम से कम 10 बेड की व्यवस्था विकसित करने और समर्पित स्ट्रोक सेंटर स्थापित करने की पहल पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया. विशिष्ट अतिथि के रूप में आईजीआईएमएस पटना के पूर्व निदेशक प्रो. डॉ. ए. के. सिंह मौजूद रहे. इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह तथा डीन स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. डॉ. रुचि सिन्हा उपस्थित रहीं. कार्यक्रम का आयोजन न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय के नेतृत्व में किया गया।

अपने संबोधन में प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि स्ट्रोक के मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए एम्स पटना में कम से कम 10 बेड की विशेष व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है. उन्होंने ‘टाइम इज ब्रेन’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि स्ट्रोक के उपचार में प्रत्येक मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है. मरीज को जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, मस्तिष्क को होने वाली क्षति और स्थायी विकलांगता का खतरा उतना ही कम किया जा सकेगा.

विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. ए. के. सिंह ने स्ट्रोक की रोकथाम के लिए शुरुआती स्तर पर जोखिम कारकों की पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता बतायी. उन्होंने एम्स पटना को स्ट्रोक प्रबंधन के क्षेत्र में आदर्श चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी ने महिलाओं के स्वास्थ्य और संतुलित पोषण को स्ट्रोक की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बताया. चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया. वहीं, डीन स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. डॉ. रुचि सिन्हा ने कहा कि आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाकर स्ट्रोक की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय ने एम्स पटना में समर्पित स्ट्रोक सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता बतायी. उन्होंने कहा कि युवाओं में धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं. इससे बचाव के लिए युवाओं को जागरूक करना जरूरी है।

वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के आधुनिक उपचार, रेडियोलॉजिकल हस्तक्षेप, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विचार साझा किए. पीएमआर विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार पांडेय ने स्ट्रोक के बाद मरीजों की कार्यक्षमता दोबारा बहाल करने में संज्ञानात्मक चिकित्सा और पुनर्वास की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. रेडियो डायग्नोसिस के प्रोफेसर डॉ. सुभाष कुमार ने आधुनिक उपचार पद्धतियों और सक्रिय चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया. वहीं, डॉ. आनंद कुमार राय ने स्ट्रोक के निदान और प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में एम्स पटना और आईजीआईएमएस के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया. वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. रविकीर्ति, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. निस्का सिन्हा, डॉ. संतोष कुमार निराला, डॉ. मेघा सैगल और डॉ. पुनीत कुमार चौधरी सहित कई विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए. कार्यक्रम के माध्यम से स्ट्रोक से बचाव, शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार और बेहतर पुनर्वास के लिए विभिन्न चिकित्सा विभागों के बीच समन्वय को आवश्यक बताया गया।

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