समालखा, धर्मवीर शर्मा : आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा संबंधित मजदूर संगठन सीटू जिला कमेटी के नेतृत्व में सोमवार को समालखा विधानसभा क्षेत्र की आशा वर्कर्स ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधायक मनमोहन सिंह बड़ाना के कोठी स्थित कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और घेराव किया।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जीटी रोड स्थित गेट के बाहर बैरिकेडिंग कर दी थी। मौके पर बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कार्यालय के अंदर जाने की मांग की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बैरिकेड हटाते हुए कार्यालय परिसर में पहुंचकर घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा सरकार और विधायक मनमोहन सिंह बड़ाना के खिलाफ नारेबाजी को लेकर प्रदर्शनकारियों और कार्यालय परिसर में मौजूद कुछ युवाओं के बीच कहासुनी और झड़प की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और युवाओं को वहां से हटाया। इसके बाद विधायक के प्रतिनिधि एवं पीए ने कथित दुर्व्यवहार को लेकर प्रदर्शनकारियों से माफी मांगी।
प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
यूनियन की ओर से विधायक मनमोहन सिंह बड़ाना के प्रतिनिधि एवं पीए विवेक त्रिपाठी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के नाम अपनी मांगों से संबंधित लिखित ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व मजदूर संगठन सीटू के राज्य सचिव सुनील दत्त, आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान एवं यूनियन की पूर्व संस्थापक व राज्य प्रधान सुमन शर्मा, समालखा ब्लॉक प्रधान मनजीत, समालखा अर्बन प्रधान शकुंतला, जिला सह-सचिव सुनीता बापौली सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। इस दौरान आशा वर्कर्स गोयला खुर्द, रीना, संतोष, क्रैच वर्कर्स की जिला प्रधान नूतन शर्मा, सचिव पूनम सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
यूनियन नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आशा वर्कर्स ने अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की थी। इसके बावजूद सरकार द्वारा परियोजना वर्कर्स, आशा, आंगनवाड़ी, मिड-डे मील और क्रैच वर्कर्स की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार आश्वासन देती रही, लेकिन मांगों को लागू करने के मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यूनियन ने मांग की कि सभी परियोजना वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक कम से कम 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद 21 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
1 से 3 दिसंबर दिल्ली में संसद घेराव का ऐलान
यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि मांगें पूरी नहीं होने पर 1 से 3 दिसंबर तक देशभर की परियोजना वर्कर्स के साथ दिल्ली में संसद घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही मजदूरों के हड़ताल के अधिकार और श्रम कानूनों को प्रभावित करने वाले चार लेबर कोड वापस लेने की मांग भी उठाई गई।
यूनियन ने केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025 में संसद में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से घोषित 1500 रुपये की बढ़ोतरी को तत्काल लागू करने की मांग की।
हरियाणा सरकार को भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आशा वर्कर्स नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के साथ पूर्व में हुई बैठकों में कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उन्हें अभी तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने वर्ष 2023 में हुई राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान फिक्स मानदेय और इंसेंटिव में हुई कटौती का पूरा भुगतान करने की भी मांग उठाई।यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सहमति बनी मांगों को जल्द लागू नहीं किया गया तो हरियाणा सरकार के खिलाफ भी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।किसान सभा ने दिया आशा वर्कर्स को समर्थन प्रदर्शन को अखिल भारतीय किसान सभा ने भी समर्थन दिया। किसान सभा के जिला प्रधान डॉ. सुरेंद्र मलिक और जिला सचिव राजपाल ने कहा कि आशा वर्कर्स स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं। सरकार को उनकी मांगों का तत्काल समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का किसान भी आशा वर्कर्स के संघर्ष के साथ खड़ा है।
