दिल्ली, सोनू कुमार : प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत रक्षा निर्यात, राजनीतिक सहयोग और मित्र देशों के मामले में लगातार नई उंचाइयों को छू रहा है। आज आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में, करगिल विजय दिवस के वीर सैनिकों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन देशवासियों को अपने बहादुर सैनिकों के असाधारण शौर्य की याद दिलाता है और हर भारतीय को गर्व से भर देता है। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशवासियों से अपील की कि वे एक सुरक्षित, सक्षम और आत्म-निर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लें।
श्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष एक विशेष शौर्य विजय यात्रा का आयोजन किया गया है जिसकी शुरुआत 14 जुलाई को दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक से हुई है। यह मोटरसाइकिल रैली द्रास में करगिल युद्ध स्मारक तक जाएगी। इसका संदेश है–वन राइड, वन नेशन, वन सैल्यूट। श्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि देश के लिए किए गए बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी तकनीकी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल युद्धपोत महेंद्रगिरि की चर्चा की जिसका निर्माण भारत में ही किया गया है। इसकी 75 प्रतिशत सामग्री स्वदेशी है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने लंबी दूरी के पिनाका रॉकेट और कुश मिसाइल के सफल परीक्षण पर प्रसन्नता व्यक्त की। श्री मोदी ने इन सफलताओं को भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की साझा उपलब्धि बताया। उन्होंने भारत के रक्षा उपकरण और तकनीक के प्रति वैश्विक समुदाय में बढ़ते विश्वास पर संतोष व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले रविवार को विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का ऐसा पहला रॉकेट है जिसे निजी क्षेत्र ने विकसित किया है। श्री मोदी ने असाधारण कौशल, जुनून और धैर्य के लिए युवा नव-प्रवर्तकों की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि भारत में अंतरिक्ष का क्षेत्र लंबे समय तक निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा जिसके कारण युवा प्रतिभाओ को अपनी क्षमता के प्रदर्शन का अवसर नही मिल सका। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने अंतरिक्ष के क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोल दिया है और दुनिया परिणाम देख रही है।
कैच द रेन अभियान के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि चार जुलाई से यह विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जलाशयों तथा बागानों के जीर्णोद्धार को नई गति मिल रही है। श्री मोदी ने इस अभियान में गांव और शहरों से लेकर पंचायतों और सामाजिक संगठनों तक की जबरदस्त भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पुराने तलाबों से गाद हटाई जा रही है और कुओं तथा बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
अब भू-जल पुनर्भरण के लिए बोरवेल का उपयोग नही किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश के सीधी जिले में लगभग डेढ हजार तालाबों का निर्माण किया गया है। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में अमृत सरोवरों को नया जीवन दिया गया है और महाराष्ट्र के नाशिक में कई जलाशय विकसित किए गए हैं। आन्ध्रप्रदेश नांदयाल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान में शामिल हैं और पुराने तालाब फिर से उपयोग के लायक बना दिए गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ के कोरबा, ओडिसा के भुवनेश्वर और आन्ध्रप्रदेश के विजयनगरम में भी इस अभियान के उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने देशवासियों से आसपास के तालाब या कुएं या बावडी की जिम्मेदारी लेने की अपील की ताकि एक-एक बूंद जल को बचाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले, स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में शुरू हुए राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल खिलाड़ियों का पूरा देश उत्साहवर्धन कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय की कामना है कि सभी खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के समय में, देश के युवाओं ने खेलों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पीवी सिंधु बैडमिंटन में जापान ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं।
वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लंदन के लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट मैच जीतकर इतिहास रच दिया है। श्री मोदी ने कहा कि इसी मैदान पर भारत ने 1983 में अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था और अब नारी शक्ति ने राष्ट्र को ये गौरव दिलाया है। प्रधानमंत्री ने केरलम में, एर्नाकुलम जिले के दक्षिण चित्तूर में खेलों के लिए की गई एक पहल की चर्चा की। वहां के एक स्कूल में एक संस्कृत क्लब है जहां के शिक्षक अभिलाष संस्कृत को अद्भुत तरीके से लोकप्रिय बना रहे हैं। अक्षरा कंदुक नाम की इस परियोजना में, फुटबॉल के शब्दों को जोड़कर संस्कृत के शब्दों की सरल व्याख्या की जाती है। श्री मोदी ने कहा कि इससे सीखने की प्रक्रिया रुचिकर बन गई है और लोगों में खेल के प्रति भी एक गहरी समझ विकसित हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित में ओलंपियाड का आयोजन किया गया जिसमें भारतीयों ने शानदार प्रदर्शन किया। भौतिकी ओलंपियाड में भारत के सभी पांच विद्यार्थियों ने स्वर्ण पदक जीते। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि पिछले दशक में भारतीय विद्यार्थियों ने प्रत्येक भौतिकी ओलंपियाड में एक स्वर्ण या रजत जीता है। रसायन ओलंपियाड में भी भारत के सभी विद्यार्थियों ने स्वर्ण जीते।
श्री मोदी ने कहा कि यह भारत का अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत के सभी विद्यार्थियों ने जीव विज्ञान ओलंपियाड में भी एक स्वर्ण सहित पदक जीते। गणित ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों ने दो स्वर्ण और चार रजत जीते। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें देश की युवा शक्ति पर गर्व है।
प्रधानमंत्री ने कश्मीर में, सरकंडे और धान के भूसे से बनाई जा रही वागु चटाई की चर्चा की। इसकी शुरुआत कश्मीर के दलदली क्षेत्रों से घास और सरकंडे की कटाई से होती है। श्री मोदी ने कहा कि दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में लगभग चार दिन लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस चटाई के उपयोग में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है।
लेकिन तब श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तनजिला ने वागु कला को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उनके इस मिशन को स्थानीय सरकार से भी सहयोग मिला और अब यह हस्तकला तेजी से देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कश्मीर की वागु चटाई को अपने घर का हिस्सा बनाएं।
प्रधानमंत्री ने बिजनौर के लक्खीवाला गांव के स्व-सहायता समूह का जिक्र किया जिसने विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल चाय तैयार की है। इस चाय में लेमन ग्रास, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसे प्राकृतिक तत्वों का मिश्रण है। श्री मोदी ने कहा कि अपने अद्भुत स्वाद और गुणवत्ता के कारण इस चाय ने लोगों के बीच तेजी से अपनी एक अलग पहचान बना ली है।
इस हर्बल चाय को प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय खाद्य महोत्सव में काफी सराहना मिली। श्री मोदी ने कहा कि पूरा व्यवसाय सिर्फ एक लाख रूपए के निवेश से शुरू किया गया और अब यह ब्रांड देश के महत्वपूर्ण संस्थानों तक अपनी पैठ बना चुका है।
प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि देश के लोग एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने अहमदाबाद के भदाज इलाक़े का उदाहरण दिया जहां साढ़े तीन लाख से अधिक पौधे सिर्फ एक घंटे में लगाए गए। यह उपलब्धि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। श्री मोदी ने कहा कि उत्तर-प्रदेश में भी 12 जुलाई को एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि वे उत्तर-प्रदेश के एक संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि लगभग साठ वर्ष बाद, गुजरात में गिर के जंगल, एक बार फिर भारतीय ग्रे हॉर्नबिल का निवास बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का कचरा प्रकृति के लिए नुकसानदेह बना हुआ है। उन्होंने प्लास्टिक के उचित निस्तारण पर बल दिया। श्री मोदी ने बिहार के सीतामढ़ी में, कचरे से कंचन का एक उदाहरण दिया जहां कचरे को दोबारा उपयोग करके सुंदर बेंच बनाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गणेश उत्सव के दौरान पीओपी के बजाय मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा के उपयोग की अपील की।
प्रधानमंत्री ने जापान में कार्यरत खगोल भौतिक विज्ञानी, मणिपुर के डॉ. रोनाल्डो लैशराम का भी उल्लेख किया। वे उस दल का हिस्सा थे जिसने नई आकाशगंगाओं के एक बड़े समूह की खोज की थी। उन्होंने इस पूरे समूह को मणिपुर की खूबसूरत लोकटुक झील से जोड़ते हुए लोकटुक प्रोटो–क्लस्टर नाम दिया। लोकटुक, ताजे पानी की एक बड़ी झील है। श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि मणिपुर का लोकटुक आज न केवल देश में, बल्कि ब्रह्माण्ड में अपनी चमक बिखेर रहा है।
देशभऱ में 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये दिन देश के बुनकरों के कौशल और रचनात्मकता के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से हथकरघा कला को प्रोत्साहित करके बुनकरों का सम्मान करने और ‘लोकल फॉर वोकल‘ की भावना को और मजबूत करने की अपील की। श्री मोदी ने कहा कि देश में जिस तरह से हथकरघा उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे बड़ी संख्या में लोगों के जीवन में सुधार हो रहा है।
पोचमपल्ली से पटना तक और कुथमपल्ली से कच्छ तक इसके कई उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि लोग ‘पोचमपल्ली इकत’ की सुंदर परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं अन्य महिला बुनकरों को ऊनी उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केरल की पारंपरिक ‘कसवु कला’ को भी संरक्षित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने खादी का भी जिक्र किया और कहा कि महात्मा गांधी को खादी बहुत प्रिय थी। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में खादी की बिक्री छह गुना बढ़ी है। अब यह बिक्री लगभग आठ हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। श्री मोदी ने लोगों से आगामी त्योहारी मौसम में खादी, हथकरघा या हस्तशिल्प से बना कम से कम एक उत्पाद खरीदने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों में लोकप्रिय ‘चोंगप्रेंग’ वाद्य यंत्र की जानकारी दी। बांस से बना यह वाद्ययंत्र तीन तारों वाला होता है और इसकी ध्वनि सरोद जैसी होती है। उन्होंने बताया कि युवाओं में इसकी लोकप्रियता कम होने लगी थी। सूरज कुमार देबबर्मा ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने सभी से अपने आस-पास के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने का आग्रह किया।
कल, 27 जुलाई को भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरणादायक पहलू थे, लेकिन एक शिक्षक की भूमिका उनके दिल के सबसे करीब थी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। श्री मोदी ने कहा कि इस सप्ताह गुरु पूर्णिमा भी मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा सभी मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
अंत में, प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस उन अनगिनत नायकों को याद करने का दिन होता है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ‘हर घर तिरंगा‘ अभियान ने पूरे देश को एकजुट किया है और इस वर्ष भी इसे पूरे उत्साह से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने सभी से एकबार फिर 15 अगस्त से पहले मॉय गॉव पोर्टल पर अपने विचार और सुझाव साझा करने का आग्रह किया।
