पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) 16 जुलाई 2026 ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) बिहार प्रदेश अध्यक्ष एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) व्यवसायिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक कुमार वर्मा जी के नेतृत्व में आज AIJGF के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री चिराग पासवान जी से नई दिल्ली में महत्वपूर्ण मुलाकात कर भारतीय ज्वेलरी उद्योग से जुड़े चार राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विस्तृत चर्चा की तथा प्रत्येक विषय पर तैयार किए गए विस्तृत नीति-प्रस्ताव एवं सुधार रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत का ज्वेलरी उद्योग देश के सबसे बड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों में से एक है, जिससे लगभग 3.5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इसलिए उद्योग से जुड़े विषय केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रोजगार, वित्तीय समावेशन, विदेशी मुद्रा बचत, निर्यात, उपभोक्ता संरक्षण एवं विकसित भारत के लक्ष्य से भी सीधे जुड़े हुए हैं।
1 BNS धारा 317 (पूर्व IPC धारा 411) हेतु एकरूप जांच व्यवस्था
AIJGF ने माननीय मंत्री जी के समक्ष मांग रखी कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 317 के अंतर्गत पूरे देश में एकरूप जांच व्यवस्था लागू की जाए, ताकि ईमानदार एवं कर-अनुपालक ज्वेलर्स को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके तथा अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित हो।
फेडरेशन ने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाए, सभी राज्यों के लिए समान जांच प्रोटोकॉल लागू किया जाए, दस्तावेज़-आधारित जांच को प्राथमिकता दी जाए, जीएसटी, केवाईसी, क्रय अभिलेख एवं सीसीटीवी रिकॉर्ड को प्रारंभिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाए, ऑडियो-वीडियो खोज एवं जब्ती अभिलेखीकरण, डिजिटल जब्ती सूची, अंतर्राज्यीय जांच व्यवस्था तथा पुलिस अधिकारियों के लिए आभूषण व्यापार प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाए।
AIJGF का स्पष्ट संदेश रहा
अपराधियों पर कठोर कार्रवाई • ईमानदार ज्वेलर्स को विधिसम्मत संरक्षण
2 राष्ट्रीय साहूकारी नीति
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग साहूकारी कानून लागू होने के कारण व्यापारियों एवं ग्राहकों दोनों को अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
AIJGF ने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय आदर्श साहूकारी नीति तैयार करने, समान न्यूनतम मानक विकसित करने, पात्र एमएसएमई, एलएलपी एवं निजी लिमिटेड कंपनियों को राज्य कानूनों के अनुरूप लाइसेंस का अवसर प्रदान करने, डिजिटल अभिलेख एवं पारदर्शी अनुपालन प्रणाली विकसित करने तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
फेडरेशन ने इस विषय पर एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति गठित कर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श प्रारंभ करने का भी अनुरोध किया।
AIJGF का मानना है कि इससे ग्रामीण वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा, अवैध साहूकारी पर नियंत्रण होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी, एमएसएमई को मजबूती मिलेगी तथा राज्यों के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
- स्वर्ण मुद्रीकरण योजना का पुनर्गठन एवं राष्ट्रीय बुलियन बैंक व्यवस्था
AIJGF ने कहा कि वर्ष 2015 से लागू स्वर्ण मुद्रीकरण योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है। वर्तमान व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है क्योंकि घरेलू निष्क्रिय स्वर्ण अभी भी अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाया है।
प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के समक्ष राष्ट्रीय बुलियन बैंक व्यवस्था का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत गिफ्ट-आईएफएससी एवं इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के माध्यम से बुलियन बैंक की स्थापना, स्वर्ण जमा योजना, स्वर्ण धातु ऋण, विनियमित स्वर्ण ऋण व्यवस्था, मध्यम एवं दीर्घकालिक स्वर्ण जमा योजनाओं का पुनः प्रारंभ, कर एवं जीएसटी तटस्थ व्यवस्था तथा राष्ट्रीय डिजिटल निगरानी मंच विकसित करने का सुझाव दिया गया।
AIJGF ने कहा कि देश में स्वर्ण खरीद कम करना स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि देश के घरों, मंदिरों, ट्रस्टों एवं संस्थानों में उपलब्ध निष्क्रिय स्वर्ण को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाना ही वास्तविक समाधान है।
फेडरेशन का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, आयात निर्भरता कम होगी, रोजगार सुरक्षित रहेगा, ज्वेलर्स को पारदर्शी स्वर्ण धातु ऋण उपलब्ध होगा तथा भारत वैश्विक बुलियन केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
- राष्ट्रीय स्वर्ण एवं रजत मूल्य प्राधिकरण
AIJGF ने माननीय मंत्री जी के समक्ष राष्ट्रीय स्वर्ण एवं रजत मूल्य प्राधिकरण (एनजीपीए) के गठन का ऐतिहासिक प्रस्ताव भी रखा।
फेडरेशन ने कहा कि वर्तमान समय में देश में स्वर्ण एवं रजत के लिए कोई आधिकारिक राष्ट्रीय संदर्भ मूल्य उपलब्ध नहीं है। विभिन्न शहरों एवं बुलियन एसोसिएशनों द्वारा अलग-अलग दरें घोषित किए जाने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है तथा ईमानदार एमएसएमई ज्वेलर्स को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
AIJGF ने सुझाव दिया कि भारत सरकार एक स्वतंत्र राष्ट्रीय स्वर्ण एवं रजत मूल्य प्राधिकरण का गठन करे, जो प्रतिदिन वैज्ञानिक एवं पारदर्शी प्रणाली के आधार पर राष्ट्रीय आधिकारिक स्वर्ण एवं रजत संदर्भ मूल्य घोषित करे। यह केवल एक राष्ट्रीय मानक संदर्भ मूल्य होगा, जबकि प्रत्येक ज्वेलर अपने व्यवसाय एवं लागत के अनुसार बिक्री मूल्य निर्धारित करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र रहेगा।
फेडरेशन का मानना है कि इससे पूरे देश में मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी होगा, उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा, एमएसएमई ज्वेलर्स को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा मिलेगी, सरकार को आँकड़ा-आधारित नीति निर्माण में सहायता मिलेगी तथा भारतीय स्वर्ण बाजार वैश्विक स्तर पर अधिक संगठित एवं विश्वसनीय बन सकेगा। श्री अशोक कुमार वर्मा जी ने कहा
भारत का ज्वेलरी उद्योग केवल व्यापार नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका, देश के एमएसएमई क्षेत्र, निर्यात, विदेशी मुद्रा बचत एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण शक्ति है। AIJGF सरकार के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक एवं दूरदर्शी नीति सुधार चाहता है जो उद्योग को सुरक्षित, पारदर्शी, आधुनिक, तकनीक आधारित एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकें।
श्री चिराग पासवान जी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उद्योग से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों एवं सुझावों पर संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सकारात्मक समाधान की दिशा में आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
*प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे
.श्री पंकज अरोरा, राष्ट्रीय महासचिव लोजपा (आर)
- श्री अशोक कुमार वर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष (व्यावसायिक प्रकोष्ठ), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
- श्री सागर केसरवानी राष्ट्रीय मीडिया सचिव, AIJGF श्री अजय भंडारी अंतरराष्ट्रीय एवं एमएसएमई अध्यक्ष, AIJGF श्री अजय अग्रवाल श्री सुरेंद्र जैन
समापन AIJGF ने विश्वास व्यक्त किया कि आज प्रस्तुत किए गए ये चार व्यापक नीति प्रस्ताव—BNS धारा 317 हेतु एकरूप जांच व्यवस्था, राष्ट्रीय साहूकारी नीति, राष्ट्रीय बुलियन बैंक व्यवस्था एवं राष्ट्रीय स्वर्ण एवं रजत मूल्य प्राधिकरण भारतीय ज्वेलरी उद्योग में ऐतिहासिक सुधारों की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।
फेडरेशन ने भारत सरकार के साथ इन सभी विषयों पर विस्तृत तकनीकी सहयोग, नीति निर्माण एवं सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करने की अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता भी दोहराई तथा विश्वास व्यक्त किया कि इन सुधारों से भारत का ज्वेलरी उद्योग अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, संगठित एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनकर “विकसित भारत” के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
