पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) चिकित्सा केवल उपचार का विज्ञान नहीं बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और प्रभावी संवाद की कला भी है। इसी सोच को साकार करते हुए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में “स्वास्थ्य सेवाओं में संवाद” विषय पर राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।
“सहानुभूति से मरीजों की सुरक्षा तक: नैदानिक अभ्यास में प्रभावी पेशेवर संवाद” विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देशभर के एनबीईएमएस से मान्यता प्राप्त संस्थानों के 700 से अधिक चिकित्सा शिक्षक, विशेषज्ञ चिकित्सक, स्नातकोत्तर प्रशिक्षु एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी संवाद को एक अनिवार्य व्यावसायिक कौशल के रूप में स्थापित करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मुख्य अतिथि के रूप में किया जबकि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेठ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में विजय कुमार चौधरी ने कहा कि प्रभावी संवाद मरीज और चिकित्सक के बीच विश्वास का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में संवाद कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में एनबीईएमएस की पहल की सराहना की।
डॉ. अभिजात शेठ ने कहा कि एक उत्कृष्ट चिकित्सक की पहचान केवल उसके ज्ञान और कौशल से नहीं बल्कि उसकी संवेदनशीलता और संवाद क्षमता से भी होती है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में मरीज केंद्रित दृष्टिकोण को और सशक्त बनाने पर बल दिया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि मरीज केवल उपचार नहीं बल्कि चिकित्सक का व्यवहार और संवाद भी जीवनभर याद रखते हैं। उन्होंने कहा कि एम्स पटना ऐसे चिकित्सकों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ मानवीय मूल्यों और करुणा को भी समान महत्व दें।
यह राष्ट्रीय कार्यक्रम डॉ. एस. एन. बसु की दूरदर्शी पहल का परिणाम है जिनके नेतृत्व में एनबीईएमएस ने देशभर में “कम्युनिकेशन इन हेल्थकेयर” को स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग बनाया है।
कार्यक्रम का आयोजन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. मुक्ता अग्रवाल ने आयोजन सचिव के रूप में कार्यक्रम की संपूर्ण योजना, समन्वय एवं सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने मरीज-केंद्रित संवाद, चिकित्सकीय व्यवहार में सहानुभूति, कठिन परिस्थितियों में प्रभावी संवाद, गंभीर समाचार साझा करने की कला, विवाद समाधान, अंतर-व्यावसायिक समन्वय तथा संवाद कौशल के आधुनिक प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए। केस-आधारित चर्चाओं और सहभागितापूर्ण सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने संवाद कौशल के व्यावहारिक एवं प्रभावी आयामों को समझा।
राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि एनबीईएमएस चिकित्सा शिक्षा को केवल ज्ञान और तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से भी समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। संवाद को चिकित्सा का अभिन्न अंग बनाकर एनबीईएमएस ऐसे चिकित्सकों का निर्माण कर रहा है जो अपने ज्ञान, संवेदनशीलता और व्यवहार से मरीजों का विश्वास जीतने के साथ-साथ देश में अधिक सुरक्षित, मानवीय और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बना सकें।
