भागलपुर, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने आज भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु पर रिकॉर्ड समय में निर्मित चार बेली ब्रिजों का उद्घाटन कर उन्हें आम जनता को समर्पित किया।
इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि माननीय केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य सरकार, जिला प्रशासन, सीमा सड़क संगठन (सीमा सड़क संगठन), पथ निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से यह महत्वपूर्ण कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है।
उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु के कुछ स्लैब क्षतिग्रस्त होने के बाद आम जनता को हो रही कठिनाइयों को देखते हुए सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। परिणामस्वरूप मात्र 16 से 20 दिनों के भीतर चार बेली ब्रिजों का निर्माण कर उन्हें जनता के उपयोग हेतु उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि स्टील संरचना से निर्मित ये बेली ब्रिज आपात परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी अवसंरचना निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम लोगों को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेली ब्रिजों के चालू होने से भागलपुर सहित आसपास के जिलों के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी ।
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी पुनर्निर्माण के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुरूप कार्य पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो संकल्प लेते हैं, उसे पूरा करने की प्रतिबद्धता भी रखते हैं तथा निर्धारित अवधि के भीतर क्षतिग्रस्त स्लैब का पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।
इस अवसर पर मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चारों बेली ब्रिजों का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन रात्रि में एक घंटे का ब्लॉक लेकर आवश्यक मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य किया जाए। साथ ही प्रतिदिन ड्रोन के माध्यम से वीडियोग्राफी कर संरचना की स्थिति का आकलन किया जाए, ताकि किसी भी संभावित समस्या की समय रहते पहचान कर उसका समाधान किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान बीआरओ, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों, अभियंताओं, कर्मियों तथा निर्माण कार्य से जुड़े सभी सहयोगियों को उनके उत्कृष्ट योगदान, समर्पण एवं अथक परिश्रम के लिए सम्मानित किया गया।
