फारबिसगंज, (न्यूज़ क्राइम 24) प्रखंड के डॉ भीम रॉव अम्बेडकर आवासीय विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और पॉक्सो एक्ट की दी गई जानकारी पेनल एडवोकेट राहुल रंजन के द्वारा पॉक्सो कानून की बारीकियों को डिजीटल स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से बेहद सरल और सुगम शब्दों में समझाया गया ताकि सभी शिक्षक इसे व्यावहारिक रूप से लागू कर सकें। कार्यक्रम में पैनल एडवोकेट राहुल रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि पॉक्सो अधिनियम का निर्माण बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें एक भयमुक्त वातावरण देने के लिए किया गया है। कानून अपनी जगह सशक्त है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इसके प्रावधानों को कितनी संवेदनशीलता के साथ लागू करते हैं। जब भी कोई पीड़ित बच्चा हमारे सामने आता है, तो एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिभावक के रूप में हमारी संवेदनशीलता जागृत होनी चाहिए। कार्यवाही के दौरान बच्चे की पहचान गोपनीय रखना और उसे किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से बचाना हमारी कानूनी और नैतिक ड्यूटी है।

पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए ताकि अपराधियों में कानून का खौफ हो और बच्चों में सुरक्षा का भाव उत्पन हो सके। कार्यक्रम में बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल एडवोकेट राहुल रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि नालसा जागृति योजना, 2025 के तहत आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कानून की जानकारी को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना और व्यवस्था से जुड़े हर शिक्षक एवं बच्चों को संवेदनशील बनाना है। बाल अपराधों की रोकथाम के लिए विधिक साक्षरता सबसे बड़ा हथियार है। अक्सर जागरूकता के अभाव में कई मामले सामने ही नहीं आ पाते या रिपोर्ट करने में देरी हो जाती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का यह निरंतर प्रयास है कि कोई भी पीड़ित बच्चा या उसका परिवार विधिक सहायता से वंचित न रहे। हमारे पास पीड़ितों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता, काउंसिलिंग और पुनर्वास के पर्याप्त प्रावधान हैं। पैनल एडवोकेट राहुल रंजन ने छात्राओं को अधिकारों, सुरक्षा उपायों और यौन अपराधों से बचाव की जानकारी दी।
उन्होंने पॉक्सो अधिनियम 2012 के प्रमुख प्रावधान बताते हुए कहा कि किसी भी तरह का अनुचित स्पर्श या व्यवहार गलत है और इसकी सूचना घर के बड़े लोगों या शिक्षकों को तुरंत देनी चाहिए। सत्र में गुड टच और बैड टच का अंतर, साइबर अपराध और सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा हुई। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रम से क्अल ओफ़े न्सिस एक सु ्ट का संक्षिप्त रूप‘पोक्सो’ है| 18 साल से कम उम्र के किसी बच्चे (चाहे लड़का हो या लड़की) , के साथ यौन अपराध हुआ या करने का प्रयास किया गया, तो ऐसे मामले पोक्सो कानून के अंतर्गत आते हैं| यह कानून बच्चों को लैंगिक हमले, लैंगिक
उत्पीड़न और अश्लील चित्र व साहित्य के इस्तेमाल जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है| ऐसे अपराधों
का विचारण करने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई है| 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को इसमें शामिल किया गया है
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानून संबंधी जानकारी देना था.कार्यक्रम में मुख्य रूप से बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) 2012 के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. पैनल एडवोकेट राहुल रंजन ने बच्चों एवं शिक्षकों को बतलाया कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों की रोकथाम और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए यह कानून बेहद महत्वपूर्ण है. बच्चों को यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की प्रताड़ना, शोषण या अपराध की स्थिति में वे कानूनी सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की भी जानकारी दी गई।
पैनल एडवोकेट राहुल रंजन ने कहा कि इस अधिनियम के तहत जरूरतमंद और पीड़ित बच्चों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है. श्री राहुल रंजन ने बच्चों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि जागरूकता ही बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने का सबसे मजबूत माध्यम है. कार्यक्रम के अंत में छात्रों को कानून और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जागरूक रहने की अपील की गई. कार्यक्रम में मुख्य रूप से विद्यालय के प्रधानध्यापक कृष्ण कांत, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बसंत कुमार सिंह, अधिकार मित्र युगल किशोर गुप्ता, शिक्षकों में मुख्य रूप से नवनीत कुमार, बिपिन कुमार, खोज नारायण साहू, समीर कुमार सहित दर्जनों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया।
