बिहार

बेटी-रोटी के रिश्तों के बीच बढ़ती तस्करी बनी सीमा सुरक्षा की बड़ी चुनौती

अररिया, रंजीत ठाकुर। भारत-नेपाल की खुली सीमा वर्षों से दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी के मजबूत रिश्तों की पहचान रही है, लेकिन अब यही खुली सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों खाद्य सामग्री, कपड़ा, चीनी और खाद की तस्करी के साथ-साथ गांजा, स्मैक, चरस, कोकीन और शराब जैसे मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही तेजी से बढ़ रही है। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि तस्कर अब ग्रामीण रास्तों, खेतों और पगडंडियों का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहे हैं। कई बार तस्करों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प एवं मारपीट की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

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नरपतगंज क्षेत्र के बेला, बसमतिया, घूरना, फुलकाहा और पथरदेवा जैसे इलाके तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। नेपाल से सटे इन क्षेत्रों में छोटे रास्तों और खुली आवाजाही का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से सीमा पार कर लेते हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही हैं, बावजूद इसके तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल के महीनों में एसएसबी और बिहार पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में गांजा और नेपाली शराब बरामद की है। कई तस्करों की गिरफ्तारी भी की गई है। इस बाबत एसएसबी मुख्यालय बथनाहा के सहायक सेनानायक मदन मोहन भट्ट ने कहा सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा तस्करी के खिलाफ लगातार सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। पुलिस के सहयोग से भी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती ग्रामीणों का कहना है कि तस्करी के कारण क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। लोगों ने प्रशासन से सीमा पर निगरानी और सख्ती बढ़ाने की मांग की है। एसएसबी अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर आधुनिक तकनीक और खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी मजबूत की जा रही है। स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है, ताकि सीमा क्षेत्र को सुरक्षित और तस्करी मुक्त बनाया जा सके।

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