बिहार

पटना सिटी के काली मंदिर में उमड़ती है आस्था, तांत्रिक परंपरा से भी जुड़ा है इतिहास

पटनासिटी, (न्यूज़ क्राइम 24) राजधानी पटना के ऐतिहासिक क्षेत्र पटना सिटी में खाजेकलां घाट (श्मशान घाट) जाने वाले मार्ग पर स्थित प्राचीन काली मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। घाट से ठीक पहले स्थित यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच अत्यंत पूजनीय माना जाता है और इसका संबंध प्राचीन तांत्रिक एवं अघोर परंपरा से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर सदियों पुराना है। खाजेकलां क्षेत्र व्यापारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, वहीं श्मशान घाट के समीप स्थित होने के कारण माँ काली के इस स्वरूप को “जागृत शक्तिपीठ” के रूप में देखा जाता है। पुराने समय में तांत्रिक साधक और अघोर पंथ के अनुयायी यहां साधना किया करते थे।

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मंदिर के गर्भगृह में माँ काली की भव्य प्रतिमा स्थापित है। इसके साथ ही यहां प्राचीन पिंडियों की भी पूजा की जाती है, जिन्हें मंदिर की प्राचीनता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस मंदिर के दर्शन से मानसिक परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर क्षेत्र की रक्षा करने वाला शक्तिस्थल भी माना जाता है। मान्यता है कि माँ काली की कृपा से यह इलाका प्राकृतिक आपदाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रहता है। मंदिर में सामान्य दिनों के अलावा मंगलवार, शनिवार और अमावस्या के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती आयोजित की जाती है। दीपावली के दौरान कार्तिक अमावस्या की रात यहां भव्य काली पूजा का आयोजन होता है, जिसमें निशिता काल में तांत्रिक विधि से विशेष पूजा संपन्न कराई जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा यह काली मंदिर आज भी पटना सिटी की सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

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