अररिया, रंजीत ठाकुर : फाइलेरिया एक दीर्घकालिक व जटिल बीमारी है। इससे रोगी के हाथ-पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में असामान्य सूजन हो जाती है। यह सूजन न सिर्फ शारीरिक कष्ट देती है, बल्कि मरीजों के सामाजिक व आर्थिक जीवन को भी प्रभावित करती है। मरीजों के फाइलेरिया प्रभावित अंग के सूजन को नियंत्रित करने व उन्हें होने वाली शारीरिक कष्ट से निजात दिलाने के उद्देश्य से जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग द्वारा मरीजों के बीच एमएमडीपी किट यानी मोर्बेडिटी मैनेजमेंट, एंड डिसेब्लिटी प्रीवेंशन किट का वितरण किया जा रहा है। अररिया पीएचसी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान पीएचसी प्रभारी डॉ प्रह्लाद कुमार निराला की अगुआई में पूर्व से चिह्नित फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरित किया गया। मौके पर बीएचएम खतीब अहमद, बीसीएम डोली सिंह, वीवीडीएस हेमंत कुमार, पवन बजरंगी सहित पीएचसी के अन्य कर्मी मौजूद थे।
किट मरीजों की तकलीफों को कम करने के लिहाज से उपयोगी
पीएचसी प्रभारी डॉ प्रह्लाद कुमार निराला ने बताया कि राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट वितरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फाइलेरिया की वजह से मरीजों को होने वाली तकलीफों को कम करने के साथ-साथ उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने बताया कि किट वितरण के क्रम में मरीजों को प्रभावित अंगों की देखरेख, साफ-सफाई व किट में उपलब्ध दवा व सामग्रियों के इस्तेमाल को लेकर जरूरी जानकारी भी दी गयी है। ताकि मरीज इसका समुचित लाभ उठा सकें।
किट में मरीजों के लिये जरूरी सामग्री शामिल
वीवीडीएस हेमंत कुमार ने जानकारी दी कि किट में साबुन, मलहम, एंटीसेप्टिक, टॉवेल, सहित अन्य जरूरी सामग्री, डब व मग जैसे सामग्री शामिल हैं। जो मरीजों के लिये रोग प्रभावित अंगों की देखभाल के लिहाज से बेहद उपयोगी है। एमएमडीपी किट की मदद से मरीज अपने घर पर ही आसानी से अपने प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल कर सकते हैं।
मरीजों को जरूरी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले में फाइलेरिया मरीजों की जरूरी चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने के प्रति विभाग सजग व गंभीर है। लाइन लिस्ट के आधार पर मरीजों के बीच एमएमडीपी किट वितरित किया जा रहा है। अगर मरीज नियमित रूप से इस किट का इस्तेमाल करे व जरूरी चिकित्सकीय सलाह को मानें तो प्रभावित अंग में सूजन व रोग संबंधी तकलीफें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
