अररिया, रंजीत ठाकुर। गर्भनिरोध संबंधी उपलब्ध उपायों की जानकारी व इसकी उपयोगिता के प्रति जन-जागरूकता, स्वस्थ प्रजनन व यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए हर साल 26 सितंबर को विश्व गर्भनिरोधक दिवस का आयोजन किया जाता है। मौके पर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। विभिन्न संस्थानों से इसे लेकर जागरूकता रैली, साइकिल रैली व संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सदर अस्पताल से स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निकाली गयी जागरूकता रैली का सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह, डीआईओ डॉ मोईज, डीपीएम संतोष कुमार ने हरी झंडी दिखाकर नगर भ्रमण के लिये रवाना किया। मौके पर डीपीसी राकेश कुमार, डीसीएम सौरव कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के संजय झा, राजीव कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मी मौजूद थे।
नियोजन उपायों के प्रति अभी जागरूकता की कमी –
सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि विश्व गर्भनिरोधक दिवस का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को गर्भनिरोध के उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देते हुए इसके उपयोग के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में फैमिली प्लानिंग व अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिये कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल बढ़ा है। बावजूद इसके जिले की बड़ी आबादी आज भी गर्भनिरोध संबंधी उपायों की उपयोगिता व महत्व से अनजान है। ऐसे लोगों को जागरूक करते हुए गर्भनिरोध के उपलब्ध संसाधनों में अपनी सुविधा मुताबिक विकल्पों के चयन को लेकर प्रेरित व प्रोत्साहित करना इस विशेष दिवस का प्राथमिक उद्देश्य है।
गर्भनिरोध के इस्तेमाल के हैं कई फायदे –
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज ने बताया कि परिवार नियोजन व गर्भनिरोध संबंधी बातों पर चर्चा करने में लोग आज भी कतराते हैं। जबकि महज परिवार का आकार छोटा रखने ही नहीं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल हमें एचआईवी एड्स सहित अन्य यौन संक्रमणों से बचाव के साथ-साथ मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने का एक आसान जरिया है। विश्व गर्भनिरोध दिवस की थीम इस साल विकल्पों की शक्ति रखा गया है।
लोकप्रिय हो रहा है नियोजन संबंधी अस्थायी उपाय-
डीपीएम स्वास्थ्य संतोष कुमार ने बताया कि हाल के वर्षों में जिले में नियोजन के अस्थायी उपाय लोग के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। एनएफएचएस 05 के आंकडों के मुताबिक जिले में पांच साल के दौरान नियोजन संबंधी उपाय अपनाने वाले परिवार की संख्या में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जिले में 15 से 49 साल के बीच मां बनने वाली 46 फीसदी महिलाएं किसी न किसी तरह के नियोजन उपायों को अपनाती हैं।
वहीं 42 फीसदी महिलाएं नियोजन के लिये आधुनिक तरीकों पर विश्वास करती हैं। स्थायी नियोजन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ कर 36 फीसदी तक पहुंच गया है। वर्तमान में 0.1 प्रतिशत महिलाएं आईयूपीडी, पीपीआईयूडी का इस्तेमाल करती हैं। वहीं 0.9 फीसदी महिलाएं गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नियोजन के लिये लगभग 05 फीसदी कंडोम या गर्भ निरोधक इंजेक्शन का इस्तेमाल जिले में किया जा रहा है।
