मधुबनी जिले के प्रसिद्ध एवं प्राचीन शिव मंदिर ॐ कारनाथ महादेव मंदिर में आज ब्रह्म बेला से ही भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी थी जो देर शाम तक चलता रहा। श्रद्धालुओ की किसी प्रकार की दिक्कत न हो इस पर काफी व्यवस्था किया गया है
महाशिवरात्रि के पर्व को महिलाएं पुरुषो और बच्चे, मंगल चरण गाते हुए आसपास गाँवो की एनएच 527 सी के रास्तों से होकर भगवान शिव के दर्शन के लिए आने लगी, मंदिर में आधी रात्री के उपरांत मंदिर का पट खोल दिया गया। ताकि किसी भी श्रद्धालु को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नही करना पड़े।
सभी शिव भक्तों ने अपने हाथों में धतूर, अक्षत, गुड़, चन्दन, मधु, दूध, गंगाजल व पूजन सामग्री लिए हुए भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी मन्नतें मांगी। भक्तों की सुविधा के लिए महिला एवं पुरुष शिव भक्तों की अलग अलग कतारे बनाई गयी थी। जो क्रमवार से मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव और पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि के ही दिन फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि को हुआ था।
इसी लिए महिलाए लम्बी सुहाग के लिए व्रत व पूजन करती है। मंदिर में सुबह से ही शिव चर्चा, कीर्तन कर भगवान शिव की अराधना कर भगवान शिव को प्रसंन किया जाता है। ॐ कारनाथ महादेव मंदिर के पुजारी महेश पाठक कहते है कि समुन्द्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को लेकर देवताओं में बेचैनी बढ़ गई। देवता गण इस विष को लेकर भगवान आशुतोष के पास पहुचे।
जहा भवगान शिव से विष के निदान कर जगत के कल्याण का उपाय पूछा। भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए विष को अपने कंठ में समाहित कर लिया। जिससे उनका कंद नीला हो गया। जिससे भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी कहा गया है। विष धारण के बाद वे उद्विन्न हो गए। उन्हें शांत करने के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु ने दूध, दही, घी, शहद के साथ गंगाजल से स्नान कराए। देवताओं ने भी उनको जलाभिषेक किया।
उधर मंदिर के व्यवस्था के लिए मंदिर के वरिष्ठ सदस्य विनोद वियोगी, विकास कुमार , अंजनी कर्ण, प्रभाष कर्ण, शीतल प्रसाद, ब्रह्मदेव लाल दास, पशुपति कुमार, बीरेंद्र पाठक, महेश पाठक समेत कई लोग उपस्थित थे।
