बिहार

शुरूआती दौर में रोग की पहचान व उपचार से कैंसर का इलाज होता है आसान

अररिया(रंजीत ठाकुर): कैंसर दुनिया में मौत के दूसरे सबसे बड़े कारणों में से कैंसर एक है। हाल के में दिनों में बिहार सहित देश के अन्य राज्यों में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी बढ़ रह है। कैंसर रोग के प्रति आम लोगों को जागरूक करने व इसकी रोकथाम को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हर साल 04 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस का आयोजन किया जाता है।

गौरतलब है कि लाइफ स्टाइल में बदलाव, रेगुलर स्वास्थ्य जांच, शुरूआती दौर में रोग की पहचान व उपचार से कैंसर से होने वाली मौत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लिहाजा विश्व कैंसर दिवस के मौके पर जिले में जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां यों आयोजित की जानी है।

सात दिनों तक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष कैंसर स्क्रीनिंग सह परामर्श शिविर आयोजित किया जायेगा। इस क्रम में सदर अस्पताल सहित अनुमंडल अस्पताल फारबिसगंज, रेफरल अस्पताल रानीगंज व जोकीहाट सहित सभी पीएचसी व हेल्थ एंड वैलनेस सेंटरों पर कैंसर के उपचार व इससे बचाव संबंधी उपायों के प्रति आम लोगों को जागरूक किया जायेगा।

कैंसर से बचाव व निदान के प्रति जागरूकता जरूरी

जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कहा कि कैंसर इस साल “क्लोज द केयर गेप” की थीम पर विश्व कैंसर दिवस आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर कई तरह के होते हैं। इसके कारण भी अलग-अलग होते हैं।

विश्व कैंसर दिवस का उद्देश्य आम लोगों को इससे बचाव व निदान संबंधी उपायों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित शिविर में जांच के क्रम में संभावित मरीजों को राज्य के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान आईजीएमएस पटना, एम्स, पीएमसीएच, महावीर कैंसर अस्पताल आदि में आवश्यक इलाज के लिये रेफर किया जायेगा।

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संयमित जीवनशैली से कैंसर से बचाव संभव

कैंसर रोग से संबंधित कारणों की जानकारी देते हुए जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मोईज ने बताया कि धूम्रपान, अत्यधिक वजन, शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव, तंबाकू का सेवन आदि कैंसर रोग के कारण बन सकते हैं। इससे बचाव के लिये संयमित जीवन शैली, पर्याप्त पोषाहार, नशापान से दूरी व नियमित व्यायाम व योगाभ्यास जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कैंसर कई तरह के होते हैं। इसमें मुँह मूंह का कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेन कैंसर, गोल ब्लाइडर, पैक्रियाटिक, प्रोस्टेट, गर्भाशय, किडनी व फेफडे, लिवर व आंत, गले का कैंसर वर्तमान में बेहद आम हो चुका है। आधुनिक जीवन शैली भी कैंसर रोग को का बढ़ावा दे रहा है।

औद्योगिकरण की वजह से बढ़ता प्रदूषण, जंकफूड का इस्तेमाल, शारीरिक श्रम से दूरी, देर से सोना व देर तक जागना, तनाव व नशीले पदार्थ कासेवन कैंसर के खतरों को बढ़ा रहा है। संयमित जीवन शैली अपना कर हम इसका मजबूती से मुकाबला कर सकते हैं।

शुरूआती दौर में पहचान से इलाज संभव

सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि शरीर के किसी अंग में असामान्य सूजन या कड़ापन, नहीं भरने वाले गांठ व, लगातार वजन कम होना या बुखार रहना, शौच व मूत्र में खून का आना, स्तन में सूजन के साथ-साथ चार से छह सप्ताह तक लगातार दस्त की शिकायत कैंसर रोग से जुड़े सामान्य लक्षण हो सकते हैं। इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों से जरूरी परामर्श के साथ-साथ इलाज कराना चाहिए जरूरी है।

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