बिहार

जिले में नवनियुक्त लैब टेक्नीशियन को दिया जा रहा जरूरी प्रशिक्षण

अररिया(रंजीत ठाकुर): चिकित्सक छोटे से छोटे से बीमारी का पता लगाने के लिये मरीज की कई जांच कराते हैं। ताकि असली मर्ज का पता लगाकर मरीज का सही इलाज किया जा सके। ऐसे में सही इलाज के लिये गुणवत्तापूर्ण जांच भी जरूरी होती है। सरकारी अस्पतालों में जांच की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाल ही में जिले के सभी नौ प्रखंडों में लैब टेक्नीशियन बहाल किये गये हैं। नवनियुक्त लैब टेक्नीशियन को बेहतर तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला यक्ष्मा केंद्र द्वारा उन्हें जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण में उन्हें ट्रूनेट मशीन के संचालन व जांच के बेहतर व सटीक परिणाम प्राप्त करने को लेकर जरूरी जानकारी सीडीओ डॉ वाईपी सिंह व जिला टीबी व एड्स समन्वयक दामोदर प्रसाद की अगुआई में दी जा रही है।

रोग की सही पहचान से होता है इलाज आसान :

सीडीओ डॉ वाईपी सिंह ने बताया कि प्रखंड स्तर पर लैब टेक्नीशियन बहाल किये जाने से जिले में लैब टेक्नीशियन की कमी दूर हुई है। इससे पीएचसी स्तर पर आम लोगों के लिये विभिन्न जांच की सुविधा आसान होगी। इससे राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को जहां मजबूती मिलेगी। वहीं सरकार के अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी ये मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि जांच के सटीक नतीजे किसी भी बीमारी के सफल इलाज के लिहाज से जरूरी है। जिले में टीबी उन्मूलन को प्रयासों को बढ़ावा मिलने की बात उन्होंने कही। सीडीओ ने कहा कि टीबी रोगियों के समुचित इलाज के लिये हेल्थ वेलनेस सेंटर सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में सीएचओ बहाल किये गये हैं। ताकि स्थानीय स्तर पर टीबी मरीजों का इलाज की समुचित सुविधा उपलब्ध करायी जा सके।

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ट्रूनेट मशीन के सफल संचालन व जांच के बेहतर परिणाम होंगे प्राप्त :

जिला टीबी व एड्स समन्वयक दामोदर प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस उद्देश्य से हर स्तर पर जरूरी कोशिशें की जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में टीबी के मामलों की सटीक पहचान के लिये जिले के सभी पीएचसी में ट्रूनेट मशीन उपलब्ध करायी गयी है। नवनियुक्त एलटी को ट्रूनेट मशीन के सफल संचालन, जांच के बेहतर परिणाम हासिल करने को लेकर जरूरी जानकारी दी जा रही है। शुरुआती दौर में टीबी मरीजों की पहचान होने से आसानी से उनका इलाज हो सकेगा। अब ट्रूनेट जांच के लिये लोगों को जिला मुख्यालय आने की मजबूरी से भी निजात मिल जायेगी। जांच में एमडीआर रोगियों की पहचान होने पर उन्हें आवश्यक प्रक्रिया के बाद भागलपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया जायेगा। जहां 14 दिनों तक भर्ती रखकर जरूरी दवाएं दी जाती हैं। प्रशिक्षण में एलटी सुब्रत कुमार, रविशंकर कुमार शर्मा, चंद्रमोली वत्स, तेज नारायण वत्स, उत्तम कुमार, बाबर हुसैन, मुस्ताक आलम, नौशाद आलम, नीतेश कुमार शामिल थे।

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