खगौल(अजित यादव): देश की आजादी के लिए भगत सिंह ने बहुत सारे सपने देखे थे, उनका सपना था कि मुल्क में धर्म के नाम पर कभी लड़ाई झगड़ा न हो । भगत सिंह का यह विचार 75वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित सूत्रधार खगौल द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘भगत सिंह फांसी की काल कोठरी से’ में दिखा। रविवार को जमालउद्दीन चक स्थित सूत्रधार के कार्यालय परिसर में स्वतंत्रता दिवस समारोह एवं नाट्य-सह-सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार कमलेश द्वारा लिखित इस नाटक के निर्देशक थे वरिष्ठ रंगकर्मी एवं सूत्रधार के महासचिव नवाब आलम । शोएब कुरैशी ने एकल अभिनय से भगत सिंह की मनु स्थिति को उभारने में सफल रहे । नाटक में संगीत परमानंद पासवान एवं भोला ने दिया । नाटक में देशभक्ति और देश के हालात को दिखाने की कोशिश की गई। नाटक में दिखाया गया कि क्या हम अपनी आजादी के बारे में नहीं सोच सकते। क्या हम खुली हवा में सांस नहीं ले सकते। भगत सिंह शेर की तरह गरजते हैं बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है । नाटक में यह भी दिखाया गया की फांसी पर चढ़ने से पूर्व भगत सिंह किस विचारों से जूझ रहे थे पूरी रात वह और समाज को लेकर मन में उठ रहे विचारों से जूझ रहे थे ।रात के एक बज गए फिर भी मुझे नींद क्यों नहीं आती , क्या मौत से पहले की रातों में ऐसा ही होता है उसके बाद आगे कहते हैं विचारों को जंजीरों में कैद नहीं किया जा सकता और अंत में अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों, खुश रहो अहले चमन, अलविदा मेरे देश के 30 करोड़ लोगों अलविदा |नाटक के पूर्व दर्शकों को संबोधित करते हुए सूत्रधार के महासचिव नवाब आलम ने कहा कि यह नाटक ऐसे समय, जब देशभक्ति के नाम पर लोगों को सांप्रदायिक उन्माद और साकिर्णतावाद के अंधे कुएँ में धकेला जा रहा है, भगत सिंह, पंडित नेहरु और गाँधी बहुत याद आते है | उनके विचार और उनके सपने आज भी एक बेहतर भारत के निर्माण की लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए हथियार की तरह है, यह एक ऐसा हथियार है जिससे जनता के दुश्मन डरते हैं | यही कारण है कि भगत सिंह के विचार और उनके सपने को एक साजिस के तहत इस देश के लोगों से दूर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन देश के नौजवान ऐसा नहीं होने देंगे | इस अवसर पर अपने संबोधन में दानापुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि भगत सिंह किसी व्यक्ति का नाम नहीं बल्कि एक विचार का नाम है | उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने तो भगत सिंह को फाँसी दे दी लेकिन उनके विचार आज भी हमारे बीच है | इस अवसर पर डा गौतम भारती,उदय शंकर यादव, गिरिधर पाठक,अशोक कुणाल,प्रसिद्ध यादव, उमा गुप्ता,राम नारायण पाठक,विष्णु गुप्ता ने भी संबोधित किया। सूत्रधार की गायन टीम ने देश भक्ति गीतों की प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि लोग देशभक्ति के भावों से सराबोर हो गए।
