पटना, जया कुमारी : कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार के अंतर्गत पटना संग्रहालय में शुक्रवार को जापान के प्रख्यात कला संरक्षक टोकियो हासेगावा के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। हासेगावा मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले प्रमुख संवाहक माने जाते हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, विभाग के सचिव प्रणव कुमार, पटना संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा सहित कई कलाकार, शोधार्थी और कला प्रेमी मौजूद रहे।
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने में टोकियो हासेगावा का योगदान ऐतिहासिक है। वर्ष 1980 में मिथिला चित्रकला से प्रभावित होकर वे जापान से मधुबनी पहुंचे और वहां के कलाकारों के साथ मिलकर इस कला को विश्व पटल पर स्थापित करने का संकल्प लिया। उनके प्रयासों से बिहार की इस लोककला का गौरव विश्वभर में बढ़ा।
सचिव प्रणव कुमार ने भी हासेगावा के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि हासेगावा का जीवन समर्पण और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का अद्भुत उदाहरण है।
अपने संबोधन में टोकियो हासेगावा ने कहा कि मिथिला चित्रकला केवल कला शैली नहीं, बल्कि बिहार की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘स्टोन म्यूजिक’ रहा। टोकियो हासेगावा एवं उनकी टीम ने पत्थरों से उत्पन्न ध्वनियों पर आधारित अनूठी संगीत प्रस्तुति दी। प्रकृति, संगीत और मानव जीवन के सामंजस्य का संदेश देने वाली इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
