बलिया, संजय कुमार तिवारी : मनियर ब्लॉक के दिघेडा ग्रामसभा के रानीपुर से एक दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक पैर से दिव्यांग बच्ची के हौसले के आगे जिला प्रशासन को भी झुकना पड़ा। सात महीने की उम्र में सड़क हादसे में पैर गंवाने वाली बच्ची रोज एक पैर के सहारे 400 मीटर दूर स्कूल जाती है। बच्ची की भावुक अपील पर जिलाधिकारी खुद उसके घर पहुंचे और उसे ट्राई साइकिल तोहफे में दी।तस्वीरों में दिख रही ये बच्ची रागिनी उम्र करीब 6 साल और हौसला पहाड़ से भी बड़ा।बलिया के मनियर विकास खंड के रानीपुर गांव की रहने वाली रागिनी जब सिर्फ सात महीने की थी, तभी एक सड़क हादसे में उसने अपना एक पैर गंवा दिया था।
जब रागिनी बड़ी हुई तो अपने साथ के बच्चों को स्कूल जाते देख रोने लगती थी और माता-पिता से स्कूल जाने की जिद करती थी। परिवार ने उसकी जिद के आगे हार मान ली और उसका दाखिला स्कूल में करा दिया। आज रागिनी कक्षा एक की छात्रा है और रोज एक पैर के सहारे उछल-उछल कर 400 मीटर दूर स्कूल जाती है। कई बार रास्ते में थक कर गिर जाती है, रोने लगती है, लेकिन स्कूल जाना नहीं छोड़ती।रागिनी की इस पीड़ा को देख किसी ने उसका वीडियो बनाकर जिला प्रशासन तक पहुंचा दिया, जिसमें रागिनी ने एक पेअर पर चलकर स्कूल जा रहींहै और साइकिल की मांग की थी। बच्ची की इस भावुक अपील को सुनकर जिलाधिकारी मंगल प्रसाद सिंह खुद को रोक नहीं पाए और सीधे रागिनी के घर जा पहुंचे।जिलाधिकारी ने रागिनी को ट्राई साइकिल के साथ-साथ खेलकूद की सामग्री भी दी और रागिनी के घर जाने वाले रास्ते को भी बनवाने की बात कही। ट्राई साइकिल मिलते ही रागिनी के चेहरे पर जो मुस्कान आई, वो बता रही थी कि अब उसकी स्कूल की दूरी आसान हो गई है अब वह पढ़ने जाएगी और डॉक्टर बनेगी।रागिनी की मां बबीता देवी बताती है कि जिला अधिकारी आए थे और ट्राई साइकिल खेलने वाला सामान टॉफी भी दिए हैं। जिलाधिकारी ने आवास और शौचालय देने की भी बात कहि हम लोग बहुत खुश है।
रागिनी की कहानी बताती है कि अगर हौसला हो तो शारीरिक अक्षमता भी रास्ता नहीं रोक सकती और जब प्रशासन संवेदनशील हो तो ऐसे हौसलों को पंख भी जरूर मिलते हैं।
