बिहार

मोटापे पर सर्जिकल स्ट्राइक, एम्स पटना ने रचा नया इतिहास

फुलवारीशरीफ, अजित। अब अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं आम मरीजों की पहुंच में हैं और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तथा किफायती उपचार की दिशा में नया अध्याय लिखा जा रहा है.राजधानी पटना स्थित एम्स पटना ने मोटापे के इलाज में नई उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली बैरियाट्रिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की है. इस सफलता के साथ अब बिहार और आसपास के राज्यों के गंभीर मोटापे से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा.कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि बिहार में उन्नत, सुरक्षित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में मील का पत्थर है.

भविष्य में सर्जरी से पहले परामर्श, पोषण विशेषज्ञ की सलाह, मनोवैज्ञानिक सहयोग और नियमित अनुवर्ती जांच की समग्र सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। दरअसल, हाल ही में 24 वर्षीय एक महिला, जिनका वजन 110 किलोग्राम से अधिक और बॉडी मास इंडेक्स 42 से ऊपर था, उनका सफल ऑपरेशन किया गया. वह लंबे समय से पॉलीसिस्टिक ओवरी रोग, हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याओं से परेशान थीं. चिकित्सकों के अनुसार सर्जरी के बाद उनके वजन में नियंत्रित कमी आएगी, हार्मोन संतुलन में सुधार होगा और मातृत्व की संभावना भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर मोटापा केवल शरीर में चर्बी बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फैटी लिवर, जोड़ों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, स्लीप एपनिया और अवसाद जैसी बीमारियों की जड़ बन सकता है. समय पर वैज्ञानिक उपचार नहीं मिलने पर यह जीवन प्रत्याशा को भी प्रभावित कर सकता है। बैरियाट्रिक सर्जरी को मोटापे के लिए प्रमाणित और प्रभावी उपचार माना जाता है. इससे न केवल वजन कम होता है, बल्कि शरीर के चयापचय तंत्र में सकारात्मक बदलाव आता है.

रक्त शर्करा और रक्तचाप नियंत्रण बेहतर होता है तथा कई मामलों में दवाइयों पर निर्भरता घट जाती है. महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं में भी सुधार देखा जाता है। यह जटिल सर्जरी प्रो. डॉ. उत्पल आनंद, डॉ. बसंत और डॉ. कुणाल की टीम ने डॉ. निरुपम सिन्हा के मार्गदर्शन में की. एनेस्थीसिया प्रबंधन की चुनौती को ध्यान में रखते हुए एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग की टीम ने डॉ. नीरज कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिक योजना और सतर्क निगरानी के साथ सर्जरी को सुरक्षित रूप से पूरा किया. विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. उमेश भदानी ने इसे संस्थान की सामूहिक सफलता बताया।

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