पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) नालंदा चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल की संस्थागत आचार समिति (आईईसी) द्वारा 27 से 30 जुलाई 2026 तक विभिन्न विभागों के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के शोध प्रस्तावों (रिसर्च सिनॉप्सिस) की वैज्ञानिक एवं नैतिक समीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। समीक्षा का उद्देश्य शोध प्रस्तावों को वैज्ञानिक, नैतिक एवं अकादमिक दृष्टि से अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
चार दिनों तक चली इस समीक्षा प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के पीजी विद्यार्थियों के शोध प्रस्तावों का उच्च वैज्ञानिक एवं अकादमिक मानकों के अनुरूप मूल्यांकन किया गया। इस दौरान शोधार्थियों से उनके शोध की आवश्यकता, उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सांख्यिकीय विश्लेषण, नैतिक पहलुओं तथा समाज एवं मरीजों के हित में उसकी उपयोगिता से जुड़े प्रश्न पूछे गए। साथ ही शोध को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए गए।
संस्थागत आचार समिति ने स्पष्ट किया कि समीक्षा प्रक्रिया का उद्देश्य किसी शोध प्रस्ताव को चयनित या अस्वीकृत करना नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक रूप से अधिक प्रभावी, नैतिक रूप से परिपक्व और अकादमिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण बनाना है। समिति ने विश्वास जताया कि आवश्यक संशोधनों के बाद तैयार होने वाले शोध प्रस्ताव भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, जिससे संस्थान की शोध क्षमता मजबूत होगी और बिहार सहित देश के चिकित्सा विज्ञान को लाभ मिलेगा। समिति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान किसी भी चिकित्सा संस्थान की पहचान होता है। यदि शोधार्थी वैज्ञानिक ईमानदारी, नैतिक मूल्यों और उत्कृष्ट अनुसंधान पद्धति के साथ कार्य करेंगे तो नालंदा चिकित्सा महाविद्यालय राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
समीक्षा प्रक्रिया में प्रो. (डॉ.) अजय कुमार सिन्हा (सदस्य सचिव), प्रो. (डॉ.) अमिता सिन्हा, प्रो. (डॉ.) संजय कुमार, प्रो. (डॉ.) आशा सिंह, प्रो. (डॉ.) राजीव रंजन दास, आमंत्रित सदस्य प्रो. (डॉ.) आरती कुमारी, डॉ. जेबा आलम तथा डॉ. विकास शंकर (समन्वयक, संस्थागत आचार समिति) सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समिति ने बताया कि 31 जुलाई 2026 को संस्थागत आचार समिति की पूर्ण बेंच की बैठक आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता आरएमआरआई के निदेशक एवं समिति के चेयरपर्सन डॉ. कृष्णा पांडे करेंगे। बैठक में एम्स पटना के सीटीवीएस सर्जन प्रो. डॉ. संजीव कुमार, बी.आर. पटना वुमेंस कॉलेज के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष डॉ. मून सहित अन्य गैर-संस्थागत विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। समिति ने सभी शोधार्थियों से प्राप्त सुझावों एवं टिप्पणियों को शोध प्रस्तावों में शामिल कर उन्हें और अधिक वैज्ञानिक, नैतिक तथा गुणवत्तापूर्ण बनाने की अपील की, ताकि उनका शोध चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य और समाज के लिए दीर्घकालिक रूप से उपयोगी सिद्ध हो सके।
