बिहार

रमज़ान बदलाव, बरकत और आत्मशुद्धि का महीना

पटना, अजित। रमज़ान इस्लामी साल का सबसे पवित्र और बरकत वाला महीना माना जाता है. इसी महीने में अल्लाह ने कुरान शरीफ नाज़िल किया, जो इंसानियत के लिए हिदायत और रहमत है। मुसलमानों पर इस महीने रोज़ा रखना फर्ज किया गया है. रोज़ा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि बुरी आदतों से बचने और अपने चरित्र को सुधारने का अभ्यास है. यह बातें मौलाना सईदुर रहमान कासमी नाजिम इमारत शरिया (बिहार झारखंड उड़ीसा) ने कहीं।

उन्होंने आगे बताया कि रमज़ान इंसान को सब्र, अनुशासन और परहेजगारी सिखाता है. सुबह से शाम तक खाने-पीने से दूर रहना हमें एहसास कराता है कि गरीब और जरूरतमंद लोग किस तरह जीवन गुजारते हैं. इसलिए इस महीने में दान, जकात और जरूरतमंदों की मदद पर खास जोर दिया जाता है। रमज़ान की रातों में तरावीह की नमाज, कुरान की तिलावत और ज्यादा से ज्यादा दुआ करने की हिदायत दी गई है. यह महीना दिल की सफाई, बुराइयों से तौबा और अल्लाह से मजबूत रिश्ता बनाने का अवसर देता है. अगर इंसान सच्चे दिल से रोज़ा रखे और अपने व्यवहार को बेहतर बनाए, तो रमज़ान उसकी पूरी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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