बिहार से एक पुस्तक समीक्षा में अपने बातों को रखा है लेखक द्वारा की टेलीविजन पत्रकारिता स्क्रिप्टिंग रिपोर्टिंग और एंकरिंग
लेखक डॉ. देवव्रत सिंह एवं डॉ. कीर्ति सिंह प्रस्तावना डिजिटल दौर में पत्रकारिता की पाठशाला आज का दौर सूचना और संचार क्रांति का दौर है। सस्ते इंटरनेट और स्मार्टफोन ने हर व्यक्ति के हाथ में कैमरा और सूचना प्रसारित करने का मंच दे दिया है। यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में युवा अपनी बात रख रहे हैं और खुद को पत्रकार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पत्रकारिता केवल कैमरे के सामने बोलने या किसी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने तक सीमित नहीं है।
इसके लिए भाषा पर पकड़ समाचारों की समझ ऐतिहासिक दृष्टिकोण तकनीकी ज्ञान और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों की जानकारी आवश्यक है।इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डॉ. देवव्रत सिंह एवं डॉ. कीर्ति सिंह की पुस्तक ‘टेलीविजन पत्रकारिता स्क्रिप्टिंग रिपोर्टिंग और एंकरिंग महत्वपूर्ण बन जाती है। लगभग 260 पृष्ठों में समाहित यह पुस्तक पत्रकारिता के विद्यार्थियों, मीडिया में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं और टेलीविजन पत्रकारिता को गहराई से समझने वाले पाठकों के लिए उपयोगी मार्गदर्शिका है।
पुस्तक की संरचना सिद्धांत और व्यवहार का समन्वय पुस्तक को 12 अध्यायों में विभाजित किया गया है। शुरुआती अध्यायों में टेलीविजन पत्रकारिता के इतिहास और विकास पर चर्चा है, जबकि मध्यवर्ती अध्याय भाषा, समाचार लेखन और समाचार मूल्यों को समझाते हैं। अंतिम अध्यायों में रिपोर्टिंग, एंकरिंग और मोबाइल पत्रकारिता यानी MoJo जैसे व्यावहारिक विषयों को शामिल किया गया है।पुस्तक की एक विशेषता यह है कि प्रत्येक अध्याय के अंत में ‘अभ्यास कार्य’ दिए गए हैं। इससे पाठक केवल सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त नहीं करता, बल्कि उसे व्यावहारिक रूप से आजमाने का अवसर भी मिलता है।
टेलीविजन पत्रकारिता का विकास : इतिहास से वर्तमान तक
पुस्तक का पहला अध्याय भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के विकास को समझने की आधारभूमि तैयार करता है। भारत में 15 सितंबर 1959 को दिल्ली से टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में समाचार प्रसारण की व्यवस्था सीमित थी और आकाशवाणी की खबरों को टेलीविजन पर पढ़ा जाता था। इसके बाद नियमित हिंदी समाचारों और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रसारण ने इस माध्यम को विस्तार दिया।
1982 के एशियाई खेल भारतीय टेलीविजन के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए। इसी दौर में रंगीन टेलीविजन का विस्तार हुआ। ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’, ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे कार्यक्रमों ने दूरदर्शन को घर-घर तक लोकप्रिय बनाया। जे.वी. रमन, सलमा सुल्तान, गीतांजलि अय्यर, रिनी खन्ना और शाम्मी नारंग जैसे समाचार वाचकों ने अपनी विशिष्ट शैली से दर्शकों के बीच पहचान बनाई।
निजी समाचार माध्यमों के उदय ने पत्रकारिता की दुनिया को नई दिशा दी। ‘न्यूजट्रैक’, NDTV और बाद में 24 घंटे के समाचार चैनलों के आगमन ने खबरों की प्रस्तुति, गति और प्रतिस्पर्धा को बदल दिया। वर्ष 2000 में आज तक के स्वतंत्र 24 घंटे के समाचार चैनल के रूप में सामने आने के बाद समाचार प्रसारण में तेजी और आकर्षक प्रस्तुति का महत्व और बढ़ा। यह ऐतिहासिक यात्रा बताती है कि तकनीकी विकास के साथ पत्रकारिता की शैली भी लगातार बदलती रही है।
टेलीविजन की भाषा सरलता, लय और प्रभाव पुस्तक का तीसरा अध्याय टेलीविजन की भाषा को समझने में विशेष मदद करता है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि अखबार पढ़ने का माध्यम है, जबकि टेलीविजन सुनने और देखने का। इसलिए टेलीविजन की भाषा सहज, सरल, संक्षिप्त और प्रभावशाली होनी चाहिए।
कठिन शब्दों और लंबे वाक्यों की जगह छोटे वाक्य, लयात्मक अभिव्यक्तियां और याद रह जाने वाले शब्द अधिक प्रभावी होते हैं। समाचारों में अनुप्रास, उपमा, मुहावरों और फिल्मी शब्दावली का प्रयोग प्रस्तुति को रोचक बना सकता है। हालांकि, ऐसी भाषा का उपयोग समाचार की गंभीरता और तथ्यात्मकता को बनाए रखते हुए ही किया जाना चाहिए।
यह अध्याय विशेष रूप से उन युवाओं के लिए उपयोगी है जो समाचार लेखन, स्क्रिप्टिंग और एंकरिंग में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।समाचार लेखन के नियम एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका
पुस्तक का चौथा अध्याय समाचार लेखन के व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि टेलीविजन की खबरें लिखते समय दर्शकों की समझ और सुनने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। बड़ी संख्याओं को सरल रूप में प्रस्तुत करना, अनावश्यक सर्वनामों से बचना और तथ्यों को स्पष्ट शब्दों में रखना प्रभावी समाचार लेखन की बुनियादी शर्तें हैं।
लेखक पैकेज या स्टोरी, बाइट, वॉयस ओवर (VO), एंकर लिंक, एंकर ग्राफिक्स और ड्राई न्यूज जैसे प्रारूपों की जानकारी देते हैं। इससे पाठक समझ पाता है कि एक ही खबर को अलग-अलग तकनीकों से किस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है।
किसी भी समाचार में क्या, कब, कहां, कौन, कैसे और क्यों जैसे छह बुनियादी सवालों के जवाब होना जरूरी है। यह सिद्धांत समाचार को तथ्यपूर्ण, स्पष्ट और विश्वसनीय बनाने में मदद करता है। समाचार स्रोत और समाचार मूल्य पत्रकार की जिम्मेदारी पांचवें अध्याय में समाचारों के स्रोतों और समाचार मूल्यों की चर्चा की गई है। संसद, थाना, न्यायालय और अस्पताल जैसे नियमित संस्थान समाचार के प्रमुख स्रोत हैं। बजट, परीक्षा परिणाम और वार्षिक आयोजन पहले से निर्धारित घटनाओं के उदाहरण हैं,जबकि दुर्घटना भूकंप और हत्या जैसी घटनाएं अचानक समाचार का रूप लेती हैं।
लेखक स्रोतों की गोपनीयता बनाए रखने और किसी खबर की पुष्टि के लिए एक से अधिक स्रोतों पर भरोसा करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
समाचार का महत्व उसके प्रभाव निकटता ,नवीनता नकारात्मकता, प्रमुख व्यक्तित्व, टकराव, निरंतरता, प्रतिस्पर्धा और समयबद्धता जैसे मूल्यों से तय होता है। इसी संदर्भ में पुस्तक ‘टेबलॉइडीकरण’ की प्रवृत्ति पर भी ध्यान आकर्षित करती है, जिसमें गंभीर मुद्दों की तुलना में सेलिब्रिटी, सेक्स, सनसनी और स्कैंडल को अधिक महत्व दिया जाने लगता है। यह चर्चा पत्रकारिता के नैतिक पक्ष पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।
टेलीविजन कार्यक्रमों के स्वरूप : एक प्रवाहमान माध्यम
पुस्तक में टेलीविजन को ‘FLOW’ माध्यम के रूप में समझाया गया है। अखबार में पाठक अपनी पसंद से पन्ने चुन सकता है, लेकिन टेलीविजन पर कार्यक्रम निर्धारित क्रम में चलते हैं और उनके बीच विज्ञापन भी प्रसारित होते हैं।
कार्यक्रमों को कथा आधारित और वास्तविकता आधारित श्रेणियों में समझाया गया है। ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’, ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे धारावाहिकों के साथ समाचार, टॉक शो, व्यंग्य कार्यक्रम, टैलेंट शो और क्विज शो के उदाहरण देकर टेलीविजन की विविधता को रेखांकित किया गया है।निष्कर्ष पत्रकारिता में करियर बनाने वालों के लिए उपयोगी पुस्तक डॉ. देवव्रत सिंह और डॉ. कीर्ति सिंह की टेलीविजन पत्रकारिता स्क्रिप्टिंग रिपोर्टिंग और एंकरिंग सिद्धांत और व्यवहार के बीच एक उपयोगी सेतु का काम करती है। सरल भाषा, वास्तविक मीडिया उदाहरण, विषयों का क्रमबद्ध प्रस्तुतीकरण और अभ्यास कार्य इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
यह पुस्तक पत्रकारिता के विद्यार्थियों, मीडिया संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कर रहे युवाओं रिपोर्टरों,स्क्रिप्ट राइटरों और एंकरिंग में रुचि रखने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। डिजिटल युग में जब सूचना की गति बढ़ी है, तब सही और जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।कुल मिलाकर यह पुस्तक केवल टेलीविजन पत्रकारिता की जानकारी देने वाली किताब नहीं, बल्कि पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित करने वाली एक व्यावहारिक पाठशाला है। जो विधार्थी नेट की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है।
