दिल्ली, सोनू कुमार : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया है कि भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य से काफी पहले ही सिकल सेल रोग का उन्मूलन कर लेगा। उन्होंने इस आनुवंशिक रक्त विकार के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के बीच, समन्वित प्रयासों का आह्वान किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने सभी राज्य सरकारों और अधिकारियों से अपील की कि वे इस बीमारी को हल्के में न लें क्योंकि यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलती है। उन्होंने कहा कि इसका पूर्ण उन्मूलन करने के प्रयास किए जाने चाहिए क्योंकि इसका इलाज संभव है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत राज्य सरकार की उपलब्धियों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि इस मिशन के तहत राज्य ने कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रपति ने कहा कि 2023 में राष्ट्रीय मिशन के शुभारंभ के समय निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों में से एक- बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग था, और यह संतोष की बात है कि यह लक्ष्य समय से पहले ही प्राप्त कर लिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत स्थापित विशेष प्रदर्शनी का दौरा किया। प्रदर्शनी में सिकल सेल रोग की रोकथाम, निदान और उपचार से संबंधित विभिन्न पहलों को प्रदर्शित किया गया।
जनजातीय मामलों, अनुसूचित जाति कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, जन स्वास्थ्य और आयुष सहित विभिन्न विभागों ने सिकल सेल रोगियों के लिए लागू की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं, जागरूकता अभियानों और कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रस्तुत की। प्रदर्शनी में जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के कार्यों को भी प्रदर्शित किया गया।
अधिकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को स्क्रीनिंग अभियानों, आनुवंशिक परामर्श सेवाओं, मुफ्त उपचार सुविधाओं, डिजिटल प्लेटफार्मों और मिशन के अंतर्गत भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
