पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) आज पटना में होटल ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026’ में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह की उपस्थिति में बिहार में निवेश, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में बिहार में निवेश की संभावनाओं, सड़क एवं परिवहन अवसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया तथा बिहार में निवेश और औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार में सड़क एवं हाईवे अवसंरचना के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और आगामी परियोजनाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिहार में हाईवे निर्माण के क्षेत्र में ₹3,88,100 करोड़ के कार्य किए जाने हैं और वर्तमान कार्यकाल के अंत तक कुल लगभग ₹5 लाख करोड़ के काम पूरे होने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि करीब ₹33,000 करोड़ की लागत से 2,910 किलोमीटर लंबाई की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं जारी परियोजनाओं में लगभग ₹65,100 करोड़ की लागत से 1,878 किलोमीटर के कार्य चल रहे हैं, जबकि आगामी परियोजनाओं का कुल प्रस्तावित निवेश लगभग ₹3.25 लाख करोड़ है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 6,500 किलोमीटर हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है तथा विभिन्न प्रमुख कॉरिडोर पर कार्य तेजी से जारी है।
धार्मिक एवं पर्यटन महत्व की परियोजनाओं पर जोर-
श्री गडकरी ने धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने वाली परियोजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने राम-जानकी मार्ग का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 440 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत करीब ₹5,440 करोड़ है और इसका लगभग 27 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना को नवंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया।
इसी प्रकार भगवान गौतम बुद्ध से जुड़े कॉरिडोर के तहत लगभग ₹22,000 करोड़ की परियोजनाओं पर कार्य जारी है, जिसका करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर से मजबूत होगी पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी-
केंद्रीय मंत्री ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी हाई स्पीड कॉरिडोर को बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताया। लगभग ₹72,000 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में करीब ₹52,000 करोड़ का निवेश बिहार में होने की बात कही गई। लगभग 526 किलोमीटर के कॉरिडोर में करीब 410 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट को स्वीकृति मिल चुकी है तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
इसके अलावा करीब 400 किलोमीटर लंबी एक अन्य ग्रीनफील्ड परियोजना के एलाइनमेंट को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई। पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजे जाने की बात भी कही गई।
बक्सर-भागलपुर और पटना की महत्वपूर्ण परियोजनाएं-
श्री गडकरी ने बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड कॉरिडोर का भी उल्लेख किया। लगभग 218 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत करीब ₹10,000 करोड़ बताई गई है, जिसमें ब्राउनफील्ड एवं ग्रीनफील्ड दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है।
इसी क्रम में अनीसाबाद-दिदारगंज, पटना परियोजना का प्रस्ताव भी कैबिनेट में भेजे जाने की जानकारी दी गई। लगभग 13.4 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹8,500 करोड़ है।
वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर से यात्रा समय में बड़ी कमी-
केंद्रीय मंत्री ने वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर को बिहार समेत पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना बताया। लगभग 600 किलोमीटर की इस परियोजना की लागत करीब ₹32,000 करोड़ है और इसका लगभग 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर बिहार को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना पूरी होने के बाद वाराणसी से कोलकाता की यात्रा का समय लगभग 18 घंटे से घटकर करीब 5 घंटे रह जाने की संभावना है। इससे माल परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच तेज कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा-
आगामी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर को भी महत्वपूर्ण बताया गया। लगभग 550 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹45,200 करोड़ है, जिसमें बिहार में लगभग 400 किलोमीटर हिस्सा और करीब ₹26,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। परियोजना की डीपीआर दिसंबर तक पूरा किए जाने की बात कही गई।
इस कॉरिडोर के विकसित होने से रक्सौल से हल्दिया की यात्रा का समय लगभग 20 घंटे से घटकर 8 घंटे रह जाने की संभावना है। साथ ही यह बिहार के प्रमुख औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पटना रिंग रोड से शहर की यातायात व्यवस्था को मिलेगी राहत-
केंद्रीय मंत्री ने पटना रिंग रोड परियोजना को भी महत्वपूर्ण बताया। लगभग 162 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹10,200 करोड़ है। परियोजना का उद्देश्य पटना शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और शहर के आसपास की कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि पटना रिंग रोड के माध्यम से दरभंगा एयरपोर्ट को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद पटना और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा समय में कमी आने तथा शहर पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में हाईवे, एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का यह व्यापक नेटवर्क राज्य को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स की लागत और यात्रा समय में कमी आने के साथ-साथ निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और रोजगार के नए अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने, उद्योगों के विस्तार और रोजगार के अवसरों के सृजन की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने बिहार की विकास क्षमता और उभरते कारोबारी अवसरों को सामने रखते हुए उद्योग जगत से राज्य की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने राज्य में सड़क एवं कनेक्टिविटी से जुड़े विकास कार्यों और उनके औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। वहीं, उद्योग मंत्री श्रीमती श्रेयसी सिंह ने बिहार में उद्योग एवं निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों तथा राज्य में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी साझा की।
‘राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट 2026’ सरकार, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच संवाद एवं सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना। समिट के दौरान बिहार में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विस्तार और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले विभिन्न क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।
