पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी द्वारा राज्य में पूर्व से स्थापित उच्च माध्यमिक विद्यालयों में हीं चयन कर आज 551 आदर्श विद्यालयों का उद्घाटन किया गया है जिसका नामकरण ‘सरस्वती विधा निकेतन’ के रूप में किया गया है।
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि इन 551 विद्यालयों में बहुत से ऐसे भी विधालय हैं, जिसका नामकरण विधालय के संस्थापकों द्वारा किया गया था और उस विधालय की मान्यता भी सरकार द्वारा उसी रुप में दी गई है। कई भूमि दाताओं द्वारा अपना कीमती जमीन देकर अपने पूर्वजों के नाम पर विधालय की स्थापना की गई थी। वैसे विद्यालयों को ‘ सरस्वती विद्या निकेतन’ में रुपांतरित कर विधालय के पूर्व नाम को गौन कर दिया गया है।
मेरे पिता स्व. पं विन्ध्येश्वरी प्रसाद मिश्र जी ने अपना कीमती जमीन देकर अपने पिता जी और माता जी के नाम पर श्री राम परीक्षण चन्द्र ज्योति (श्री आर पी सी जे)उच्च माध्यमिक विद्यालय बेलबर घाट गोरौल (वैशाली) की स्थापना की थी। अब इस विधालय का नाम बदलकर ” सरस्वती विद्या निकेतन ( आदर्श विद्यालय) आर पी सी जे उच्च माध्यमिक विद्यालय बेलबर घाट ,गोरौल , वैशाली” कर दिया गया है। इस प्रकार नामकरण से विधालय का मौलिक नाम हीं गौन हो जाता है। और सुनने में भी उटपटांग लग रहा है।इसका नामकरण तो ” श्री राम परीक्षण चन्द्र ज्योति सरस्वती विद्या निकेतन” भी तो हो सकता है जो सुनने में भी ठीक लग रहा है। यह मामला केवल मेरा हीं नहीं है बल्कि ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुकी है।इससे संस्थापक एवं भूमि दाता के साथ हीं स्थानीय स्तर पर भी लोगों की भावनाएं आहत हो रहा है। इससे सरकार की हर वैसी योजनाएं प्रभावित होंगी जिसके लिए जन-सहयोग की जरूरत होती है। इसलिए सरकार को विद्यालयों के नामकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए।
