बिहार

एम्स पटना ने अस्पताल प्रशासकों को आपदा प्रबंधन के लिए किया तैयार

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) आपदा और स्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान अस्पतालों को और अधिक तैयार, सुरक्षित और सक्षम बनाने के उद्देश्य से एम्स पटना के अस्पताल प्रशासन विभाग ने 17 से 22 अगस्त तक अस्पताल प्रशासकों के लिए “स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए अस्पताल की तैयारी” विषय पर छह दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीन (रिसर्च) प्रो. डॉ. संजय पांडे, डीन (एकेडमिक्स) प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी, अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख डॉ. सुजीत कुमार सिन्हा तथा डॉ. राम कृष्ण मंडल मौजूद रहे। उद्घाटन के अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि आपदा के समय अस्पतालों की तैयारी केवल संसाधनों से नहीं बल्कि प्रशिक्षित टीम, बेहतर समन्वय और नियमित अभ्यास से मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आपात स्थितियों में तेजी से निर्णय लेने और मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कॉलेज ऑफ नर्सिंग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस प्रशिक्षण में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मणिपुर के अस्पताल प्रशासकों ने भाग लिया। कार्यक्रम को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के डिजास्टर मैनेजमेंट सेल का सहयोग प्राप्त था। प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों में आपदा प्रबंधन, सेफ हॉस्पिटल, इमरजेंसी प्लानिंग, मास कैजुअल्टी और मास फैटेलिटी मैनेजमेंट, प्री-हॉस्पिटल केयर, फील्ड हॉस्पिटल प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स, ट्रायेज और रैपिड हेल्थ रिस्क असेसमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

प्रतिभागियों को बुनियादी जीवन रक्षक उपाय और उन्नत आघात जीवन रक्षक सहायता का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके अलावा घटना के प्रति प्रतिक्रिया प्रणाली और अस्पताल आपातकालीन घटना प्रतिक्रिया प्रणाली की जानकारी दी गई। अचानक बढ़ी मरीजों की संख्या से निपटने की क्षमता , आपदा जोखिम संचार और अस्पताल आपदा प्रबंधन योजना पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। आपदा के दौरान विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए एनडीआरएफ, बिहार यूनिट ने सीबीआरएनई आपदाओं पर सत्र लिया और सीबीआरएनई मॉक ड्रिल भी कराया। वहीं, बिहार होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज और एम्स पटना की फायर सेफ्टी टीम के सहयोग से फायर सेफ्टी, अस्पताल की सुरक्षित निकासी और फायर मॉक ड्रिल का अभ्यास कराया गया।

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि आपदा के दौरान अस्पताल की जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं कैसे जारी रखी जाएं और आपदा के बाद सामान्य सेवाओं को जल्द से जल्द कैसे बहाल किया जाए। इसके साथ ही अस्पतालों के लिए प्रभावी डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार करने पर भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में आपदा के दौरान मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों पर पड़ने वाले मानसिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए मनोसामाजिक समस्याओं के प्रबंधन पर भी चर्चा की गई।

छह दिवसीय प्रशिक्षण का समापन पोस्ट टेस्ट, प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम में एम्स पटना के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के साथ एनडीआरएफ तथा बिहार होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज के विशेषज्ञों ने भी योगदान दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आपदा के समय “तैयार अस्पताल, प्रशिक्षित टीम और बेहतर प्रतिक्रिया” की दिशा में एम्स पटना की एक महत्वपूर्ण पहल रहा। इसके माध्यम से अस्पताल प्रशासकों को आपात परिस्थितियों में प्रभावी समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक रूप से तैयार किया गया।

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