बिहार

कटिहार में संस्थागत प्रसव को गति देने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति सख्त : निष्क्रियां आशा कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई और विस्तृत वर्क प्लान लागू

कटिहार, (न्यूज़ क्राइम 24) जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा संस्थागत प्रसव को 100 प्रतिशत तक पहूँचाने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने एक व्यापक एवं कड़ा समीक्षात्मक प्रतिवेदन जारी किया है। जुलाई से सितंबर 2026 की अवधि के आंकड़ों के गहन विश्लेषण में पाया गया कि जिले की कुल 3,108 कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं में से सितंबर माह में 774 आशा (24.9%) ऐसी पाई गईं, जिन्होंने एक भी संस्थागत प्रसव नहीं कराया है। जुलाई में जिले में कार्यरत आशा कर्मियों की संख्या 1,070 यानी 34.4% पाई गई थी। जिले में लगातार 3 महीनों से आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में आ रही असमानता को जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। जिले में संस्थागत प्रसव की स्थिति को सुदृढ़ करने और प्रत्येक गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए एक 03 चरणीय ‘विशेष कार्य योजना’ लागू की गई है।

सख्त प्रशासनिक निर्देश एवं सेवा समाप्ति की चेतावनी – कारण बताओ नोटिस :

जिले में जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में लगातार 0 प्रसव कराने वाली सभी 774 निष्क्रियां आशा कार्यकर्ताओं को 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण पत्र निर्गत किया जा रहा है। नवंबर एवं दिसंबर माह में विशेष अवसर देने के बावजूद यदि 0 प्रसव वाली आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में सुधार नहीं आता है, तो जनवरी 2027 तक उनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव जिला स्वास्थ्य समिति को भेजा जाएगा।

प्रखंड सामुदायिक प्रबंधक (बीसीएम) की जवाबदेही :

जिले में निष्क्रियां आशाओं की अधिक संख्या बीसीएम की कमजोर निगरानी को दर्शाती है। यदि बलरामपुर, कदवा, बारसोई और मनिहारी ब्लॉकों में 0 प्रसव वाली आशाओं की संख्या में 50% से अधिक की कमी नहीं आई, तो संबंधित बीसीएम के विरुद्ध वेतन कटौती एवं विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा राज्य स्वास्थ्य समिति को की जाएगी।

“कटिहार मॉडल 2026” और संस्थागत प्रसव सुधार का वर्क प्लान :

निष्क्रिय आशा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित रणनीतिक कदम उठाए गए हैं:

•पेयरिंग रणनीति (Mentorship & Buddy System): शून्य प्रसव कराने वाली प्रत्येक आशा को उस ब्लॉक की ‘स्टार आशा’ (6+ प्रसव कराने वाली उत्कृष्ट आशा कार्यकर्ता) के साथ टैग (Pair) किया जाएगा। स्टार आशा अपनी साथी आशा को क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करने, परामर्श देने और अस्पताल लाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगी।
•4th एएनसी एवं एचआरपी ट्रैकिंग: 34 से 36 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत 4th एएनसी जांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कराई जाएगी। गंभीर एनीमिया (Hb < 7 g/dl), उच्च रक्तचाप (BP > 140/90) और पूर्व सिजेरियन मामलों जैसी उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की पहचान कर ‘रेड कार्ड/रेड स्टिकर’ लगाया जाएगा और उनका अग्रिम अस्पताल लिंकेज किया जाएगा।
•102 एम्बुलेंस लिंकेज एवं ‘संध्या चौपाल’: EDD (प्रसव की संभावित तिथि) के अनुसार 102 एम्बुलेंस की पूर्व टैगिंग की जाएगी ताकि ऐन वक्त पर होम डिलीवरी को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, ‘संध्या चौपाल’ और भीएचएसएनडी सत्रों के माध्यम से समुदाय में सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने हेतु जागरूकता फैलाई जाएगी।

प्रदर्शन के आधार पर आशा कार्यकर्ताओं का 4-जोन वर्गीकरण :

•स्टार जोन (6+ प्रसव): जिला स्तर पर प्रशस्ति पत्र एवं विशेष सम्मान।
•ग्रीन जोन (3-5 प्रसव): मानक कार्यों का निरंतर संपादन।
•येलो जोन (1-2 प्रसव): बीसीएम द्वारा विशेष रि-ट्रेनिंग एवं निगरानी।
•रेड जोन (0 प्रसव): शोकॉज नोटिस और सुधार न होने पर सेवा समाप्ति।

समीक्षा बैठक का संदेश:

जिला स्वास्थ्य समिति कटिहार ने स्पष्ट किया है कि हमारा उद्देश्य प्रत्येक माँ और बच्चे को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देना है। जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी स्वास्थ्य कर्मियों एवं बीसीएम को इस कार्य योजना का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

डीपीएम कटिहार ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार को जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) द्वारा विभिन्न प्रखंड के क्षेत्र भ्रमण किया गया। इस दौरान डीपीएम द्वारा आशा कर्मियों के माध्यम से संस्थागत प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुँच रहे लोगों की जानकारी ली गई। डीपीएम द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल पहुचं रहे लोगों की संख्या में विस्तार का आशा कर्मियों को निर्देश दिया गया जिससे कि माँ और नवजात शिशु स्वस्थ्य और सुरक्षित रह सके।

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