बिहार

स्वच्छता की आवाज बनकर मंच पर उतरे बच्चे, नाटक के जरिये दिया साफ-सफाई का संदेश

फुलवारीशरीफ, अजीत। स्वच्छता केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वस्थ और बेहतर समाज की बुनियाद है. इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत मध्य विद्यालय, भूसौला में तीन दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ‘स्वच्छता की आवाज’ नाटक का प्रभावशाली मंचन कर स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को नाट्य कला के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गयी. बच्चों ने अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन और सामाजिक विषयों को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत करने की कला का प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण के बाद बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से स्वच्छता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को सहज और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया।

इस अवसर पर सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच के सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी महेश चौधरी तथा नाट्य निर्देशक एवं वरिष्ठ कलाकार मिथिलेश कुमार पांडेय ने विद्यार्थियों से संवाद किया. उन्होंने नाट्य कला के महत्व और सामाजिक जीवन में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि नाटक मनोरंजन का माध्यम होने के साथ सामाजिक जागरूकता पैदा करने का भी प्रभावी जरिया है. सामाजिक मुद्दों को अभिनय के माध्यम से लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है और उनके बीच सकारात्मक बदलाव की भावना पैदा की जा सकती है।

‘स्वच्छता की आवाज’ नाटक के मंचन के दौरान विद्यार्थियों ने साफ-सफाई, कूड़ा-कचरा उचित स्थान पर डालने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का संदेश दिया. प्रस्तुति के माध्यम से यह भी बताया गया कि स्वच्छता की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की है।

नाट्य प्रस्तुति में महेश चौधरी, मिथिलेश कुमार पांडेय, अमन कुमार, मनोज पासवान, गौरीशंकर भगत, पिंकी कुमारी, आरती कुमारी, करण कुमार एवं दीपक कुमार ने मंचीय भूमिका निभायी. विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम की सराहना करते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो. सलाम अंसारी ने कहा कि महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए मनोरंजन के साथ जागरूकता का संदेश देने वाले कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है. ऐसे आयोजन लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं. उन्होंने कहा कि स्वच्छता को आदत बनाकर ही स्वच्छ परिवार, स्वस्थ समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।

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