पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बढ़ावा देने और उन्हें आम लोगों के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में एम्स पटना और भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल ने मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल की। इस क्रम में शनिवार को एम्स पटना के सभागार में ‘वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार के लिए नियामकीय तैयारी’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका आयोजन एम्स पटना के नवाचार केंद्र, एम्स पटना इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और स्वास्थ्य क्षेत्र में नए उत्पाद विकसित करने वालों को नियामकीय प्रक्रियाओं की जानकारी देना था, ताकि वे सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पाद विकसित कर सकें। इसमें सरकारी अधिकारियों, नियामक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य शोध और नए विचारों को ऐसे उपयोगी उत्पादों में बदलने के रास्ते तलाशना था, जिनका लाभ मरीजों और आम लोगों को मिल सके।
कार्यक्रम में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार एवं वैज्ञानिक-एच तथा बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. धनंजय के. तिवारी; केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के उप औषधि नियंत्रक (भारत) श्री शिव कुमार; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स, नोएडा की निदेशक डॉ. नीलिमा मिश्रा; तथा बीआईआरएसी की उप महाप्रबंधक एवं नियामकीय मामलों, नीति और पैरवी विभाग की प्रमुख डॉ. सोनिया गांधी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए।
एम्स पटना की ओर से कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, डीन (रिसर्च) एवं कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय पांडेय, ईएनटी विभाग की अध्यक्ष एवं एपीआईआईसी की प्रधान अन्वेषक डॉ. क्रांति भावना, हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर एवं एपीबीएफआई के प्रधान अन्वेषक डॉ. सुदीप कुमार, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के अध्यक्ष तथा एपीआईआईसी के सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. अनिल कुमार और एपीआईआईसी की सीईओ एवं एपीबीएफआई की सलाहकार डॉ. मौसमी साहा ने भाग लिया।
कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण बिहार में रेगुलेटरी फैसिलिटेशन क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रहा। इसके तहत एम्स पटना के एपीआईआईसी, आईसीएमआर-राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पटना, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, हाजीपुर और आईआईटी पटना के इनोवेशन सेंटर को एक साथ जोड़ने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले नवाचारकर्ताओं को विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपने उत्पादों की जांच, चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक मंजूरी की प्रक्रियाओं को समझने में आसानी हो।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में भारत और अन्य देशों में स्वास्थ्य उत्पादों से जुड़े नियमों, मेडिकल उपकरणों की जांच, चिकित्सकीय मूल्यांकन, वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य तकनीकों, मेडिकल सॉफ्टवेयर, मरीजों के डेटा की सुरक्षा और उत्पाद बाजार में आने के बाद उसकी निगरानी जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने यूरोप और अमेरिका में लागू नियामकीय प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी। इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने से भारतीय स्वास्थ्य तकनीकों के लिए वैश्विक बाजार में अवसर बढ़ सकते हैं।
कार्यक्रम में 94वें फर्स्ट हब के अंतर्गत ‘रेगुलेटरी शिविर’ भी आयोजित किया गया। इसमें नवाचारकर्ताओं को नियामक विशेषज्ञों से सीधे बातचीत करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने अपने उत्पादों से जुड़ी नियामकीय आवश्यकताओं, जोखिम आकलन और क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस कार्यशाला ने स्वास्थ्य संस्थानों, शोध संगठनों, नियामक एजेंसियों और उद्योग जगत के बीच सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। एम्स पटना और डीबीटी-बीआईआरएसी की यह पहल बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र के नवाचार को मजबूत करने तथा सुरक्षित, प्रभावी और आम लोगों के लिए सुलभ स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
