बिहार

किशोर न्याय व्यवस्था को बाल-अनुकूल और पुनर्वास केंद्रित बनाएं : जस्टिस पंचोली

पटना, सुनील कुमार : किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक बाल-अनुकूल और पुनर्वास केंद्रित बनाने के लिए कानून के साथ प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विपुल एम. पंचोली ने शनिवार को ज्ञान भवन में कही।

किशोर न्याय अधिनियम 2015 के 10 साल पूरे होने पर पटना हाईकोर्ट, समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में राज्यस्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

मुख्य बातें :

  • जस्टिस पंचोली ने कहा – सिर्फ कानून काफी नहीं, परिवार और समुदाय आधारित देखभाल, गैर-हिरासत उपायों को मजबूत करना होगा। संस्थागत देखभाल ही पुनर्वास नहीं है। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षक और मनोवैज्ञानिक जरूरी।
  • कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह – हर बच्चा भविष्य लेकर आता है, अतीत से भविष्य तय न हो।
  • जस्टिस प्रभात कुमार सिंह – बिहार में 23 प्रेक्षण गृह और 5 सुरक्षित स्थान कार्यरत। अप्रैल 2015 से जुलाई 2024 तक 1403 बच्चों को गोद लिया गया।
  • DGP विनय कुमार – 2025 में NCRB के अनुसार राज्य में 14,699 बच्चे लापता/अपहृत हुए, जिनमें 52% की बरामदगी हुई। शुरुआती 3 से 24 घंटे में कार्रवाई जरूरी।
  • यूनिसेफ चीफ मोनिका एन. नीलसन – उद्देश्य दंड नहीं, संरक्षण और पुनर्वास है। संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प हो।

तकनीकी सत्र में बाल संरक्षण, फॉस्टर केयर, केस मैनेजमेंट सहित कई मुद्दों पर मंथन हुआ।

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