बिहार

एम्स पटना में 125 एमबीबीएस छात्रों के लिए मेंटर-मेंटी कार्यक्रम का शुभारंभ

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) भविष्य के डॉक्टरों को केवल उत्कृष्ट चिकित्सक ही नहीं बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और नैतिक मूल्यों से युक्त इंसान बनाने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा सोमवार को एमबीबीएस 2025 बैच के लिए मेंटर-मेंटी फ्रेमवर्क पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के साथ 125 नए एमबीबीएस छात्रों को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा जो उनकी पूरी मेडिकल शिक्षा के दौरान हर कदम पर उनका सहयोग करेंगे। यह पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि छात्रों के शैक्षणिक विकास, व्यक्तित्व निर्माण, मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन, शोध के प्रति रुचि और पेशेवर मूल्यों के विकास पर भी समान रूप से केंद्रित है। प्रत्येक छात्र को एक समर्पित फैकल्टी मेंटर से जोड़ा गया है जो उसे मेडिकल शिक्षा की चुनौतियों से उबरने और बेहतर चिकित्सक बनने की दिशा में निरंतर मार्गदर्शन देंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीन (एकेडमिक्स) प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी, डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) प्रो. डॉ. रुचि सिन्हा, रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. ज्योति प्रकाश, मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. पंकज कुमार, फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार मांझी, विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, मेंटर्स तथा एमबीबीएस के छात्र उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि मेंटर-मेंटी प्रणाली छात्रों को सही दिशा, आत्मविश्वास और प्रेरणा प्रदान करेगी तथा उन्हें एक सक्षम और संवेदनशील डॉक्टर बनने में मदद करेगी।

डीन (एकेडमिक्स) प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी ने कहा कि शिक्षक और छात्र के बीच नियमित संवाद से सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। इससे छात्रों की कठिनाइयों का समय पर समाधान होता है, शोध और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ती है तथा उनमें आत्मनिर्भर होकर सीखने की क्षमता विकसित होती है।

डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) प्रो. डॉ. रुचि सिन्हा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश छात्रों के जीवन का एक नया अध्याय होता है। ऐसे समय में यदि उन्हें एक अनुभवी मार्गदर्शक का साथ मिले तो वे पढ़ाई के दबाव, नई परिस्थितियों और व्यक्तिगत चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. ज्योति प्रकाश ने कहा कि मेंटर-मेंटी फ्रेमवर्क का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है जहाँ प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिले और वह अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सके। उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में भी सहायक होगी। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को मेंटर-मेंटी प्रणाली की पूरी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि नियमित मेंटर-मेंटी बैठकें, शैक्षणिक परामर्श, करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और नैतिक मूल्यों पर आधारित संवाद उनकी मेडिकल शिक्षा को अधिक प्रभावी और सहज बनाएंगे। छात्रों ने अपने-अपने मेंटर्स से परिचय प्राप्त किया और मेडिकल शिक्षा से जुड़ी विभिन्न संभावनाओं एवं अपेक्षाओं पर खुलकर चर्चा की।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की कम्पीटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन व्यवस्था में भी मेंटर-मेंटी प्रणाली को विशेष महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास, मानसिक तनाव में कमी, बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और एक सकारात्मक सीखने का वातावरण तैयार करना है। कार्यक्रम के अंत में छात्रों से सेवा, करुणा, ईमानदारी और आजीवन सीखने की भावना को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया गया। एम्स पटना ने दोहराया कि संस्थान का लक्ष्य केवल डिग्रीधारी डॉक्टर तैयार करना नहीं बल्कि ऐसे चिकित्सक तैयार करना है जो ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और समाज सेवा की भावना से भी समृद्ध हों।

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