पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) उभरते स्वास्थ्य संकटों के खिलाफ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, एम्स पटना ने आज जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए छह दिवसीय “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति प्रबंधन पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम” का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आपदा प्रबंधन सेल द्वारा वित्तपोषित इस उच्च-प्रभाव वाली पहल का औपचारिक उद्घाटन कार्यकारी निदेशक एवं सी.ई.ओ. प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल द्वारा किया गया। यह उद्घाटन कार्यक्रम संकायाध्यक्ष (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) पूनम भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, अस्पताल प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत कुमार सिन्हा और पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. रामकृष्ण मंडल की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नेतृत्वकर्ताओं को उन्नत आपदा प्रबंधन रणनीतियों से लैस करने की एम्स पटना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जब त्वरित और समन्वित चिकित्सा प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और सिक्किम के 42 जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के एक समर्पित समूह को एक मंच पर लाते हुए, इस रणनीतिक प्रशिक्षण शिखर सम्मेलन का उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के प्रशासकों को कुशल संकट प्रबंधकों (क्राइसिस कमांडर्स) में बदलना है। छह दिनों की अवधि के दौरान, प्रतिभागी पी.जी.आई.एम.ई.आर. चंडीगढ़ के अतिथि संकाय प्रो. (डॉ.) महेश देवनानी सहित शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में एक गहन, बहुविषयक पाठ्यक्रम में भाग लेंगे। कानूनी शासन, जोखिम मूल्यांकन, उन्नत महामारी विज्ञान (एपिडेमियोलॉजी) और व्यावहारिक आउटब्रेक सिमुलेशन को जोड़ने वाले इन सत्रों के माध्यम से, प्रतिभागियों को बहुआयामी सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों के बड़े संकट में बदलने से पहले उनकी पहचान करने, उन्हें रोकने और निष्प्रभावी करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की वास्तविक ताकत विपत्ति के समय ही साबित होती है, प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान प्रतिनिधियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस सम्मेलन के दौरान साझा किए गए व्यापक ज्ञान को आत्मसात करें और इन आपातकालीन ढांचों को अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में व्यावहारिक रूप से लागू करें। इन अग्रसक्रिय संकट प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर प्रशिक्षित अधिकारियों से अपने गृह जिलों में एक अभेद्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा कवच (फ़ायरवॉल) बनाने की उम्मीद है। यह सहयोगात्मक पहल यह सुनिश्चित करती है कि क्षेत्र के नागरिक भविष्य में किसी भी उभरते हुए चिकित्सा खतरे का सामना करने के लिए सुरक्षित, सक्षम और पूरी तरह से तैयार रहें।
