पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) भारत में केंद्र सरकार द्वारा मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी (ज़ोरोस्ट्रियन) समुदायों को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। यह मान्यता पूरे देश में समान रूप से लागू होती है और इन समुदायों को विभिन्न केंद्रीय योजनाओं एवं संवैधानिक प्रावधानों का लाभ मिलता है। हालांकि, संविधान और न्यायालयों की व्याख्याओं के अनुसार, राज्य सरकारों को यह अधिकार है कि वे अपने राज्य की जनसंख्या और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किसी समुदाय को भाषाई या धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता दें। इसी आधार पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समुदायों को राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर, पंजाब में सिख समुदाय राज्य की बहुसंख्यक आबादी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वह अल्पसंख्यक माना जाता है। वहीं मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, लक्षद्वीप और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में हिंदू आबादी अपेक्षाकृत कम होने के कारण राज्य स्तर पर उनकी स्थिति को लेकर समय-समय पर मांगें उठती रही हैं। इसी प्रकार महाराष्ट्र और तमिलनाडु सरकारों ने यहूदी समुदाय को राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। कई राज्यों में उर्दू सहित विभिन्न भाषाओं को भी भाषाई अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस बीच, अधिवक्ता अनवर आलम ने कहा है कि बिहार में लंबे समय से राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर मांग उठती रही है, लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उनका कहना है कि चाहे लालू प्रसाद-राबड़ी देवी की सरकार रही हो या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार, इस विषय पर कोई पहल नहीं की गई।
अनवर आलम का आरोप है कि बिहार के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें पूर्व गृह सचिव एवं मुख्य सचिव आमिर सुबहानी भी शामिल रहे, ने भी इस संबंध में कोई प्रभावी पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है, जबकि बिहार में इस दिशा में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अधिवक्ता अनवर आलम ने राज्य सरकार से मांग की है कि बिहार की जनसांख्यिकीय स्थिति और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाए, ताकि यदि कोई समुदाय राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक की परिभाषा में आता हो तो उसे विधिसम्मत अधिकार और सुविधाएं मिल सकें।
