बिहार

जलकुंभी शिल्प विकास परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर उद्योग विभाग एवं NEDFi के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) उद्योग विभाग एवं नॉर्थ ईस्टर्न डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (NEDFi) के बीच भारत सरकार के राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP) कार्यक्रम के अंतर्गत जलकुंभी शिल्प विकास परियोजना (Water Hyacinth Craft Development Project) के क्रियान्वयन हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू बिहार सरकार की माननीया उद्योग मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर माननीया मंत्री ने कहा, “जलकुंभी शिल्प विकास परियोजना बिहार के लिए पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का एक अभिनव मॉडल प्रस्तुत करती है। जलाशयों में तेजी से फैलने वाली जलकुंभी जहां एक पर्यावरणीय चुनौती है, वहीं इसे मूल्यवर्धित शिल्प उत्पादों में परिवर्तित कर हम इसे आय सृजन के प्रभावी साधन में बदल रहे हैं। इस पहल के माध्यम से न केवल जल निकायों की स्वच्छता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में सहायता मिलेगी, बल्कि ग्रामीण कारीगरों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिज़ाइन, उन्नत तकनीक और बेहतर विपणन से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाए। रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत इस परियोजना के जरिए कारीगरों को कौशल विकास, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वे प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बन सकें। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए बिहार को सतत और समावेशी औद्योगिक विकास की दिशा में आगे ले जाएगी।”

उद्योग विभाग के सचिव श्री कुंदन कुमार ने कहा, “रैम्प कार्यक्रम के अंतर्गत जलकुंभी शिल्प विकास परियोजना बिहार में सतत उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना के माध्यम से कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण, उत्पाद डिज़ाइन, गुणवत्ता संवर्धन तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे जलकुंभी आधारित शिल्प उत्पादों के लिए एक सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला तैयार होगी। यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक अवसरों में परिवर्तित करते हुए बिहार के एमएसएमई, हस्तशिल्प एवं वस्त्र क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेगी और ग्रामीण कारीगरों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने में सहायक होगी।”

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इस अवसर पर श्री कुंदन कुमार, सचिव उद्योग विभाग, एमएसएमई निदेशक श्री अमन समीर, NEDFi के महाप्रबंधक श्री आशीम कुमार दास तथा कार्यकारी अधिकारी श्री चंद्रकांत दास सहित विभाग एवं NEDFi के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह परियोजना जलकुंभी को एक उपयोगी एवं टिकाऊ कच्चे माल के रूप में विकसित करते हुए पर्यावरण अनुकूल उद्यमिता को बढ़ावा देगी। आगामी आठ माह में इस परियोजना के माध्यम से 200 कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिनमें सहरसा जिले के 150 तथा वैशाली जिले के 50 कारीगर शामिल हैं।

परियोजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (Common Facility Centres – CFCs) की स्थापना की जाएगी, जहां आधुनिक उत्पादन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही कारीगरों को कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, उत्पाद डिज़ाइन एवं नवाचार सहायता तथा प्रभावी विपणन एवं बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता एवं बाजार तक पहुंच में वृद्धि होगी।

यह पहल बिहार के हस्तशिल्प एवं वस्त्र क्षेत्र को नई गति प्रदान करने के साथ-साथ सतत उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगी, ग्रामीण समुदायों की आय में वृद्धि करेगी तथा पर्यावरण संरक्षण और समावेशी औद्योगिक विकास के राज्य सरकार के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

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