बिहार

ख़ास रिपोर्ट : जब खाकी बनी अपनों का सहारा, अस्पताल में मनाया आयुष का जन्मदिन

पटनासिटी, रॉबीन राज। पुलिस की पहचान अक्सर अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था से होती है, लेकिन पटना सिटी में चौक थाना पुलिस ने यह साबित कर दिया कि खाकी का असली धर्म केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि इंसानियत भी है। एक हादसे से बिखरे परिवार के लिए पुलिस ऐसी हमदर्द बनी कि इलाज से लेकर बच्चों की देखभाल और उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाने तक की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।

चौक थाना प्रभारी राज किशोर सिंह ने फिर से एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर साझा किया हैं। जिसमे देखने को मिला, जब अस्पताल में भर्ती मासूम आयुष का जन्मदिन पुलिसकर्मियों ने पूरे उत्साह के साथ मनाया। अस्पताल का माहौल कुछ देर के लिए खुशियों में बदल गया। पुलिसकर्मियों ने केक काटकर आयुष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उसे यह एहसास दिलाया कि वह अकेला नहीं है। इस पहल ने न सिर्फ बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटाई, बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि पुलिस केवल कानून की रखवाली ही नहीं करती, बल्कि जरूरत पड़ने पर परिवार बनकर भी साथ खड़ी रहती है।

क्या हैं पूरा मामला :

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बताया जाता हैं की मोनी उर्फ प्रिया ने साल भर पहले कन्हैया कुमार (पहला पति) को छोड़कर गोविंद (दूसरा पति) से शादी की थी। इसी बात से नाराज कन्हैया कुमार 20 मई की सुबह चौक थाना क्षेत्र के राजा बाबू गली में पेट्रोल लेकर गोविंद अग्रवाल के घर पहुंचा और विवाद के दौरान परिवार के लोगों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस दौरान आरोपी स्वयं भी आग की चपेट में आ गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही चौक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कराया। घटना में सभी लोग गंभीर रूप से झुलसे और मौत भी हो गई। जिसमे घायल दोनों मासूम बच्चों का इलाज जारी है।

बच्चों के इलाज के लिए पटना पुलिस, स्थानीय समाजसेवियों और कई लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया। अनुमंडल पदाधिकारी सत्यम सहाय एवं चौक थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह की पहल पर पुलिसकर्मियों ने अपनी-अपनी सैलरी से आर्थिक सहयोग किया। अब तक इलाज के लिए लाखों रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है और यह सहयोग लगातार जारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि अस्पताल में भर्ती बच्चों और उनकी मां की देखभाल की जिम्मेदारी भी पुलिस ने अपने कंधों पर उठा ली है। महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी नियमित रूप से अस्पताल पहुंचकर उनकी हर जरूरत का ख्याल रख रहे हैं। इलाज से लेकर भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं तक पुलिस लगातार परिवार के साथ खड़ी है।

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