पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार सरकार ने राज्य में शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और समृद्ध बनाने के लिए एक सराहनीय पहल की है। इसके तहत चाइल्ड हेल्थ से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं और पोषण सेवाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक सटीक व पारदर्शी बनाने के लिए डेटा के वैलिडेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति के शिशु स्वास्थ्य कोषांग द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर बच्चे को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पूरी गुणवत्ता और सक्षमता के साथ मिले।
चाइल्ड हेल्थ के हर पहलू पर पैनी नजर
इस व्यापक सुधार प्रक्रिया में चाइल्ड हेल्थ के हर महत्वपूर्ण पहलू को प्राथमिकता के साथ शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि शिशु रोगों के प्रभावी नियंत्रण, जैसे कि डायरिया के उपचार में ओआरएस और जिंक की समय पर उपलब्धता, तथा नवजात शिशुओं की उत्तम स्वास्थ्य देखभाल के लिए जन्म के बाद के गृह भ्रमण को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।
इस संबंध में आईजीएमआईएस में प्रोफेसर और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ रिजवान अहमर का मानना है कि बाल स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी योजनाओं की सफलता पूरी तरह विश्वसनीय आंकड़ों पर निर्भर करती है। विभाग की यह पहल समाज के सबसे वंचित बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और राज्य के मानव विकास सूचकांक को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
पोषण और नवजात देखभाल की होगी सटीक ट्रैकिंग
इसके साथ ही, नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व को बढ़ावा देने और पोषण पुनर्वास केंद्रों में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार, दाखिले व फॉलो-अप की प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित किया जा रहा है। यह पूरी मुहिम यह सुनिश्चित करती है कि चाइल्ड हेल्थ से जुड़े हर इंडिकेटर का डेटा सटीक रहे, जिससे भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल के लिए और अधिक प्रभावी योजनाएं तैयार की जा सकें।
विभाग की सक्रियता से सुदृढ़ होगी व्यवस्था
राज्य स्वास्थ्य समिति के मार्गदर्शन में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों और प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालयों के अधीक्षकों को इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए सक्रिय किया गया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य चाइल्ड हेल्थ से जुड़े आंकड़ों को पूरी तरह प्रमाणित और सुव्यवस्थित करना है। विभाग द्वारा किए जा रहे इस प्रयास से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल अधिक पारदर्शी बनेगी, बल्कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति सरकारी संकल्प को भी धरातल पर नई मजबूती मिलेगी। इस तकनीकी प्रक्रिया और सघन मॉनिटरिंग में यूनिसेफ का भी सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
