बिहार

बिहार के कई जिलों में भारी वर्षा दर्ज; अगले 4–6 दिनों तक जारी रह सकता है मेघप्रकोप

पटना, अजित। बिहार में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और राज्य के कई जिलों में बीते 24 घंटों के दौरान तेज बारिश हुई है। राजधानी पटना में सोमवार को शाम 5:30 बजे तक 106.0 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो इस सीजन की अब तक की प्रमुख वर्षा में से एक है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 से 6 दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। पश्चिमी और पूर्वी हवाओं के टकराव के कारण बन रहे सिस्टम के चलते अत्यधिक वर्षा के हालात बने हुए हैं।

बीते 24 घंटे में इन जिलों में भारी बारिश:

नवादा के नवादा शहर में सबसे अधिक 15 सेमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सिवान के रघुनाथपुर और मुज़फ़्फरपुर के रेवा घाट में 11 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। गया के फतेहपुर और नवादा के अकबरपुर में 10 सेमी, भागलपुर के सुलतानगंज और पटना के बख्तियारपुर, फतुहा, पटना सदर, संपतचक, खुसरूपुर, दानापुर में 8–9 सेमी वर्षा दर्ज की गई। वैशाली और बेगूसराय के बरौनी क्षेत्र में भी 8 सेमी बारिश हुई।

भारी बारिश के कारण उभरीं समस्याएं:

राज्य के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में पानी भर गया है। प्रमुख शहरों में यातायात प्रभावित हुआ है, वहीं ग्रामीण इलाकों में खेतों में भी अत्यधिक पानी जमा हो गया है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब बना हुआ है, जिससे उत्तर बिहार के कुछ हिस्सों में सतर्कता की आवश्यकता है।

आने वाले दिनों में बारिश का पूर्वानुमान:

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले तीन दिनों तक पटना, नवादा, नालंदा, रोहतास, बक्सर और कैमूर जिलों में बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। वहीं गया, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, शेखपुरा, लखीसराय और जमुई में भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी इन दिनों मौसम का हिस्सा बनी रहेगी।

दक्षिण और उत्तर बिहार में स्थिति:

दक्षिण बिहार के जिलों में अच्छी वर्षा की संभावना बनी हुई है, जिससे सोन, फल्गु जैसी नदियों का जलस्तर सामान्य बना रह सकता है। उत्तर बिहार में गंगा और उसकी सहायक नदियों के आसपास के इलाकों में जलजमाव और आंशिक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कृषि पर सकारात्मक असर:

मौजूदा वर्षा खरीफ फसलों के लिए अनुकूल साबित हो रही है। कई जिलों में धान की बुआई और प्रारंभिक वृद्धि को गति मिल रही है। वर्षा के कारण सिंचाई पर निर्भरता कम हुई है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां जलस्रोत सीमित थे।

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