बिहार

कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य जांच और उपचार उपलब्ध कराने में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) कटिहार राज्य में चौथे स्थान पर

कटिहार, (न्यूज़ क्राइम 24) जन्म के बाद नवजात शिशुओं का उनके स्वास्थ्य जांच और स्थिति के अनुसार चिकित्सकों द्वारा बच्चों को सामान्य या कुपोषित चिन्हित किया जाता है। परिजनों द्वारा कुपोषित बच्चों को समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार उपलब्ध कराने से बच्चा समय पर स्वस्थ और सुरक्षित हो सकता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुपोषित बच्चों की जांच और उपचार सुविधा उपलब्ध कराने में कटिहार जिला राज्य में भागलपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली के बाद 04th स्थान पर है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग, कटिहार द्वारा सभी कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराते हुए आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराकर बच्चों को स्वस्थ्य और सुपोषित बनाया गया है।

वर्ष 2024-25 एनआरसी कटिहार से 280 कुपोषित बच्चों को किया गया सुपोषित :

जिलाधिकारी मनेश कुमार मीणा द्वारा बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में कार्यरत एएनएम, आशा कर्मियों द्वारा क्षेत्र में जन्म के बाद कमजोर, शारीरिक क्षमता में कमी वाले बच्चों को चिन्हित करते हुए विशेष जांच और उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल भेजा जाता है। अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा कुपोषित बच्चों को चिन्हित करते हुए विशेष जांच और उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में एक परिजन के साथ भर्ती कराते हुए बच्चों को स्वस्थ सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान कटिहार में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) 280 कुपोषित बच्चों को चिन्हित करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित बच्चों को स्वस्थ्य और सुपोषित किया गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी प्रखंड के स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों को क्षेत्र भ्रमण के दौरान समय पर कुपोषित बच्चों की पहचान करते हुए संबंधित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराते हुए चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने का आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है जिससे कि सभी कमजोर नवजात शिशुओं को समय पर चिकित्सकीय सहायता और उपचार उपलब्ध कराते हुए स्वस्थ और सुरक्षित किया जा सके।

जन्म से 05 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती करते हुए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराकर किया जाता है सुपोषित :

सिविल सर्जन डॉ जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया क्षेत्र में टीकाकरण के दौरान आने वाले बच्चों, स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज हेतु आने वाले बच्चों और आशा के द्वारा घर जाकर 0 से 05 वर्ष तक के कमजोर, कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है। ऐसे बच्चों को सुपोषित करने के लिए आशा, एएनएम द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। ऐसे बच्चों की पहचान के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर बच्चों को उनके परिजन के साथ एनआरसी में भर्ती कराते हुए उपचार कराया जाता है। एनआरसी में भर्ती बच्चों को इलाज के साथ-साथ बेहतर पौष्टिक आहार भी दिया जाता है। कुपोषित बच्चों को एनआरसी में रखकर इलाज व उनके लिए स्पेशल डाइट तैयार की जाती है।

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जिसमें सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज तत्व युक्त भोजन दिए जाते हैं। बच्चे मुख्यतः शिशु रोग विशेषज्ञ की देखरेख में रहते हैं। इससे समय पर कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान करते हुए स्वस्थ और सुपोषित किया जाता है जिससे बच्चे भविष्य में स्वास्थ्य और तंदुरुस्त रहते हैं। इसके लिए कटिहार जिले में सदर अस्पताल कटिहार के साथ साथ 04 और एनआरसी केंद्र कदवा, बरारी, मनिहारी और बारसोई में संचालित किया जा रहा है। सभी एनआरसी में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराते हुए बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित किया जाता है।

नवजात शिशुओं का जन्म के बाद वजन, लंबाई और ऊंचाई के अनुसार चिन्हित किया जाता है कुपोषित बच्चा :

जन्म के बाद से ही नवजात शिशुओं का सही देखभाल आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिए जिले में पोषण पुनर्वास केन्द्र का संचालन किया जाता है। इसमें एडमिशन के लिए नवजात शिशुओं का जन्म के बाद वजन, लंबाई व ऊंचाई के आधार पर उनके पोषण स्थिति की पहचान की जाती है। कुपोषित बच्चों की समय से पहचान कर उनका इलाज दो स्तर पर किया जाता है। ऐसे कुपोषित बच्चे जिन्हें केवल शारीरिक कमजोरी है लेकिन चिकित्सकीय समस्या नहीं है संवर्धन कार्यक्रम के तहत उनका इलाज समुदाय स्तर पर संचालित टीकाकरण केंद्र, आईसीडीएस द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में आवश्यक जानकारी और चिकित्सकीय सहायता प्रदान कर किया जा सकता है।

लेकिन जो बच्चे अतिकुपोषित पाए जाते हैं उसे चिकित्सक द्वारा देखरेख कर इलाज कराया जाता है। ऐसे बच्चों को दोनों पैरों में गड्ढे पड़ने वाले सूजन (इडिमा), भूख लगने की कमी के साथ अन्य चिकित्सकीय जटिलता पाई जाती है। ऐसे बच्चों को बेहतर इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या पोषण पुनर्वास केंद्र में चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है। ऐसे बच्चों को चिह्नित करते हुए उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है जिससे कि समय से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका इलाज किया जा सके और कुपोषित बच्चों की मृत्यु को रोका जा सके।

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