पटना, अजित। संपतचक नगर परिषद भले ही स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है. नगर परिषद क्षेत्र के कई वार्डों में नियमित सफाई भी नहीं हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि सफाई कर्मी रोजाना नहीं आते और केवल चुनिंदा वार्डों में ही सफाई कार्य किया जा रहा है. स्थानीय निवासी अब अपने इलाके के कूड़ा कचरा वाले जगह का फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डालकर अपने गुस्से नाराजगी का इजहार कर रहे हैं।

सबसे बदतर स्थिति वार्ड संख्या 26 चकबैरिया की बताई जा रही है. स्थानीय निवासियों के अनुसार यहां 08 मई से लेकर आज तक कूड़ा उठाने कोई भी सफाईकर्मी नहीं आया है. स्थिति यह है कि जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और दुर्गंध से मोहल्ले का वातावरण दूषित हो गया है।
लोगों का आरोप है कि सरकार ग्रामीण इलाकों को शहरी घोषित कर टैक्स तो वसूल रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं देने में विफल है. कूड़ा उठाव, नालियों की सफाई, और नियमित सफाईकर्मियों की तैनाती जैसे ज़रूरी कामों में लापरवाही बरती जा रही है।
सफाई एजेंसी द्वारा प्रति मजदूर पर जो खर्च दिया जाना चाहिए, वह भी पूरी तरह नहीं मिल रहा है. इसी वजह से कई सफाईकर्मी काम करने से कतरा रहे हैं. नतीजा यह है कि वार्डों में गंदगी का अंबार लग गया है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
इस संबंध में नगर परिषद के सभापति अमित कुमार का कहना है कि संपतचक क्षेत्र को हाल ही में नगर परिषद का दर्जा मिला है. सरकार से जितने संसाधन मिल रहे हैं, उन्हीं में बेहतर काम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर किसी मोहल्ले या वार्ड में सफाईकर्मी नहीं जा रहे हैं या सफाई कार्य प्रभावित है, तो वहां के नागरिक सीधे नगर परिषद अध्यक्ष से संपर्क करें।
सभापति ने आश्वासन दिया कि सफाई से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और ज़रूरत पड़ने पर सफाई व्यवस्था को और बेहतर किया जाएगा. नागरिकों को उम्मीद नही छोड़ना चाहिए. नगर परिषद अपने दावों को ज़मीनी स्तर पर उतारेगी और ‘स्वच्छ संपतचक, स्वस्थ संपतचक’ का सपना सिर्फ पोस्टर और नारों तक सीमित नहीं रहेगा।
