बिहार

गर्भावस्था के दौरान 80 फीसदी महिलाओं को रहता है एनीमिया का खतरा

अररिया, रंजीत ठाकुर हीमोग्लोबीन हमारे खून में मौजूद एक तरह का प्रोटीन है। जो हमारे शरीर के विभिन्न टिश्यू तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। शरीर के किसी सैल में हीमोग्लोबीन का स्तर कम या ज्यादा हो जाने से शरीर में कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो जाती है। किसी व्यक्ति में हीमोग्लोबीन का स्तर उनके लिंग व उम्र दोनों पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर पुरूषों में 13.5 से 17.5 डीएल महिलाओं में ये 12 से 15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर होता है। हीमोग्लोबीन की कमी से हम कई रोग से ग्रसित हो सकते हैं। इसमें एनीमिया प्रमुख है। महिलाओं में ये समस्या अधिक देखी जाती है। खासकर गर्भावस्था व बच्चों को स्तनपान करा रही महिलाओं को इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।

हीमोग्लोबीन की कमी एनीमिया की मुख्य वजह

जिला प्रतिरक्षण डॉ मोईज बताते हैं कि हीमोग्लोबीन की कमी एनीमिया की मुख्य वजह है। गर्भावस्था के दौरान 80 फीसदी महिलाओं को एनीमिया से ग्रसित होने का खतरा रहता है। एनीमिया की वजह से प्रसव संबंधी जटिलता बढ़ने के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु का शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित होने का खतरा रहता है। यही नहीं एनीमिया मातृ-शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। वहीं सामान्य महिलाओं के एनीमिक होने से माहवारी के दौरान रक्तस्श्राव व तकलीफ बढ़ जाती है। बालों को झड़ना, डिप्रेशन, ब्लड प्रेशर व शारीरिक दुर्बलता का बढ़ना बेहद आम है। गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबीन का स्तर 07 ग्राम प्रति डेसीमीटर से कम होना खतरनाक माना जाता है।

एनीमिया नियंत्रण के प्रति विभाग गंभीर

महिलाओं में एनीमिया के खतरों को नियंत्रित करने के लिये स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। एनीमिया नियंत्रण संबंधी उद्देश्य की पूर्ति के लिये एनीमिया मुक्त भारत अभियान के नाम से महत्वपूर्ण सरकारी योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत आशा, आंगनबाड़ी सेविका, प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को आईएफए की दवा का उम्र के हिसाब से निर्धारत खुराक का सेवन कराया जाता है। वहीं गर्भवती महिलाओं को सुदूरवर्ती इलाकों में आयोजित वीएचएसएनीडी, अरोग्य दिवस सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं को आयरन व कैल्शियम की 180 गोली नियमित सेवन के लिये दी जाती है। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के नियमित संचालित अभियान भी एनीमिया प्रबंधन में असरदार साबित हो रहा है।

योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर जोर


एनीमिया के खतरों को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग संबंधित योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर जोर दे रहा है। एचआईएमएस डाटा के मुताबिक बीते मई माह में गर्भवती महिलाओं के बीच आयरन व कैल्शियम वितरण की उपलब्धि 100 फीसदी से अधिक रही। गर्भवती महिलाओं का चार बार एनीमिया जांच मामले में विभाग की उपलब्धि 83 फीसदी रही। वहीं इस दौरान गंभीर रूप से एनीमिया पीड़ित 43 गर्भवती महिलाओं में से 38 महिलाओं का उपचार विभिन्न संस्थानों माध्यम से किया गया।

आसानी से संभव है एनीमिया से बचाव

सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि एनीमिया हमारे खान पान में पोषक तत्वों के अभाव से जुड़ी समस्या है। इससे बचाव के बेहतर खान-पान के साथ स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। एनीमिया से बचाव के लिये अपने नियमित आहार में हरी पत्तीदार सब्जी, पालक, मौसमी फल खास कर चुकंदर, अनार, अमरूद,, केला, गाजर, संतरा, टमाटर का सेवन किया जा सकता है। बादाम, किशमिश, खजूर, अंडा, चिकन, मछली, मांस व गुड का सेवन रक्त में हीमोग्लोबीन के स्तर को बढ़ाता है। जो एनीमिया के खतरों को नियंत्रित करता है। इससे जुड़ी किसी तरह की समस्या होने पर तत्काल नजदीकी सरकारी चिकित्सा संस्थान विशेष चिकित्सकों के परामर्श पर जरूरी दवाओं का सेवन जरूरी है।

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